भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के आगामी सीजन के लिए अभ्यास सत्रों और पिच प्रबंधन से संबंधित नई और सख्त गाइडलाइन्स जारी की हैं। बोर्ड द्वारा फ्रेंचाइजियों को भेजे गए 5 पन्नों के विस्तृत दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब कोई भी टीम उस पिच या नेट का उपयोग नहीं कर सकेगी जिसका इस्तेमाल पहले प्रतिद्वंद्वी टीम ने अपने सत्र के दौरान किया हो। यह निर्णय अभ्यास सुविधाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और टीमों के बीच निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
पृथक अभ्यास पिच का अनिवार्य उपयोग
बीसीसीआई के नए नियमों के अनुसार, प्रत्येक टीम के अभ्यास सत्र के लिए नई और अलग पिच तैयार करना अनिवार्य होगा। यदि एक टीम के ठीक बाद दूसरी टीम का अभ्यास सत्र निर्धारित है, तो भी दूसरी टीम को पहली टीम द्वारा उपयोग किए गए नेट्स या पिच का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इसमें थ्रो-डाउन सत्र भी शामिल हैं। यदि कोई टीम अपना अभ्यास समय से पहले समाप्त कर लेती है, तो भी प्रतिद्वंद्वी टीम को उनके द्वारा छोड़े गए रेंज-हिटिंग विकेट या नेट्स का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी और प्रत्येक सत्र के लिए नए नेट और पिच की व्यवस्था करना अब अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा होगा।
अभ्यास मैचों के लिए समयसीमा और अनुमति
बोर्ड ने अभ्यास मैचों के आयोजन को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। 5 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, किसी भी टीम को पूरे सीजन की तैयारी के दौरान अधिकतम 2 अभ्यास मैच खेलने की ही अनुमति दी जाएगी। इन मैचों के आयोजन के लिए फ्रेंचाइजियों को बीसीसीआई से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह कदम खिलाड़ियों के कार्यभार प्रबंधन और संसाधनों के इष्टतम उपयोग को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
मुख्य मैदान और पिच संरक्षण के नियम
बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में मुख्य मैच स्क्वॉयर (Main Square) का उपयोग अभ्यास सत्रों या अभ्यास मैचों के लिए नहीं किया जाएगा। चूंकि टूर्नामेंट के दौरान मुख्य पिचों को तैयार करने और उनके रखरखाव की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है, इसलिए बोर्ड ने इन पिचों के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। यदि किसी होम फ्रेंचाइजी को अभ्यास मैच के लिए मैदान की आवश्यकता होती है, तो उन्हें संबंधित राज्य क्रिकेट संघ (State Association) से संपर्क कर एक अलग अभ्यास मैदान उपलब्ध कराने का अनुरोध करना होगा। मुख्य स्टेडियम की पिचों का उपयोग केवल आधिकारिक मैचों के लिए ही सुरक्षित रखा जाएगा।
होम फ्रेंचाइजी की लॉजिस्टिक जिम्मेदारियां
दिशानिर्देशों के अनुसार, मेजबान या होम फ्रेंचाइजी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह अपनी और मेहमान टीम, दोनों के अभ्यास सत्रों के लिए आवश्यक सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। इसमें क्रिकेट से जुड़ी सुविधाओं के साथ-साथ दोनों टीमों के लिए कैटरिंग और अन्य लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करना शामिल है। हालांकि, प्लेऑफ दौर के दौरान अभ्यास सत्रों की व्यवस्था और उससे जुड़ी आवश्यकताओं का प्रबंधन सीधे बीसीसीआई द्वारा किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभ्यास सत्रों के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन करना सभी फ्रेंचाइजियों के लिए अनिवार्य होगा।
सुविधाओं के मानकीकरण पर जोर
बीसीसीआई का यह कदम आईपीएल के बुनियादी ढांचे और अभ्यास सुविधाओं के मानकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है और बोर्ड के अनुसार, इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी टीमों को तैयारी के लिए समान और उच्च स्तरीय सुविधाएं प्राप्त हों। पिचों के रोटेशन और नए नेट्स के उपयोग से खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास अनुभव मिलेगा और चोट लगने की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। राज्य संघों को भी इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उचित पिच क्यूरेटर और ग्राउंड स्टाफ तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
