ईरान में आर्थिक संकट और रिकॉर्ड महंगाई के कारण सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे देश भर में अशांति फैल गई है। इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 8 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने प्रदर्शनकारी GEN-Z के जोश को और बढ़ा दिया है, जिससे विरोध की आग और भड़क उठी है।
आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई
ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया है। 28 दिसंबर को तेहरान में दुकानदारों की हड़ताल के साथ शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन अब देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गए हैं। ईरानी करेंसी रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है, एक डॉलर के मुकाबले 14 और 2 लाख रियाल तक गिर गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में महंगाई दर 42. 2 फीसदी तक पहुंच गई, जो नवंबर से 1. 8 फीसदी ज्यादा है। खाने-पीने की चीजों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 72 फीसदी बढ़ गईं, जबकि स्वास्थ्य और दवाइयों से जुड़ी चीजें 50 फीसदी महंगी हो गईं और इन सभी कारकों ने आम जनता के जीवन को मुश्किल बना दिया है, जिससे वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।
देशव्यापी अशांति का प्रसार
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) के अनुसार, ईरान में देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर रखी हैं और सड़कों पर भारी भीड़ इकट्ठा होकर जमकर नारेबाजी कर रही है। आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। तेहरान में बाजार बंद होने के साथ शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब 22 प्रांतों के 46 शहरों में स्थित 113 स्थानों तक फैल गया है। मशहद, जाहेदान, कजवीन, हमदान और तेहरान सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जहां कड़ी सुरक्षा, सुरक्षा बलों की हिंसा और आगे की गिरफ्तारियां देखने को मिल रही हैं।
ट्रंप का बयान और Gen Z का जोश
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है, जिसने प्रदर्शनकारी GEN-Z के जोश को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाता है और उन्हें हिंसक तरीके से मारता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा और उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, "हम पूरी तरह तैयार हैं और कार्रवाई के लिए तैयार हैं। " इस बयान के बाद जहां देश के कई नेता ट्रंप के बयान के खिलाफ बोल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ GEN-Z के प्रदर्शनकारियों में उत्साह बढ़ गया है।
ईरानी कार्यकर्ता की आलोचना
ईरानी कार्यकर्ता मसीह अलीनेजाद ने ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पर तीखा हमला किया है। पेजेशकियान ने कहा था कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का विरोध करेंगे। अलीनेजाद ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, "खामेनेई और उसकी सेना ट्रिगर दबाती है और तुम तथाकथित सुधारवादी उसे सफेदपोशी देते हो। तुम्हें लोगों का खून बहाने से कोई समस्या नहीं है, तुम्हारी एकमात्र समस्या यह है कि कोई विदेशी देश इस अपराध को रोक देता है। " उन्होंने आगे लिखा, "अब समझ में आया कि लोग तुमसे नफरत क्यों करते हैं? क्योंकि तुमने आधिकारिक तौर पर यह ऐलान कर दिया है कि किसी को भी ईरानी लोगों की हत्या रोकने का अधिकार नहीं है! इसका मतलब यह है कि तुम खुद हत्यारे और आक्रामक हो, मिस्टर पेजेशकियान और " यह बयान ईरान के भीतर राजनीतिक विभाजन और विरोध को दर्शाता है।
प्रदर्शनों में बढ़ती हिंसा
शुक्रवार को तेहरान के कई इलाकों में रात के समय भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे, जिनमें दक्षिणी तेहरान के नाजियाबाद, राजधानी के पश्चिमी हिस्से के सत्तारखान और पूर्वी इलाकों नर्मक और तेहरानपार्स शामिल हैं और तेहरान के एक इलाके में प्रदर्शनकारियों ने इस्लामिक रिपब्लिक का झंडा भी उतार दिया। सबसे गंभीर हिंसा ईरान के लोरेस्तान प्रांत के अजना शहर में। देखने को मिली, जो तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। वहां सामने आए ऑनलाइन वीडियो में सड़कों पर जलती हुई चीजें और गोलियों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि लोग "शर्म करो और शर्म करो! " के नारे लगाते नजर आए।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, लोरदेगन में कुछ प्रदर्शनकारियों ने शहर की प्रशासनिक इमारतों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिनमें प्रांतीय गवर्नर कार्यालय, मस्जिद, शहीद फाउंडेशन, टाउन हॉल और बैंक शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने इसके जवाब में आंसू गैस का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, कई इमारतों को काफी गंभीर नुकसान पहुंचा और पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया, जिन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताया गया। सुरक्षा बलों की यह कार्रवाई प्रदर्शनों को दबाने के लिए की जा। रही है, लेकिन इससे लोगों का गुस्सा और भड़कने की आशंका है।