Iran Protests / ईरान में खामेनेई सरकार के खिलाफ बगावत, प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी में 200 से अधिक की मौत

ईरान में 14 दिनों से जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। खामेनेई सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं, जिससे तेहरान में 200 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। सुप्रीम लीडर ने अमेरिका को इन प्रदर्शनों का जिम्मेदार ठहराया है, जबकि आर्थिक संकट और प्रतिबंधों को मुख्य कारण बताया जा रहा है।

ईरान में पिछले चौदह दिनों से अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है और देश भर में आम जनता सड़कों पर उतर आई है, जो खामेनेई सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी और असंतोष व्यक्त कर रही है। इन विरोध प्रदर्शनों ने देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक गंभीर चुनौती पेश की है, जहां नागरिक अपने अधिकारों और बेहतर जीवन की मांग कर रहे हैं। इन दो हफ्तों के दौरान, प्रदर्शनों की तीव्रता और फैलाव लगातार बढ़ता गया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।

तेहरान में 200 से अधिक मौतें

टाइम मैगजीन और डॉक्टरों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी तेहरान में 200 से अधिक लोगों के मारे जाने की भयावह खबर सामने आई है और यह आंकड़ा सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई गोलीबारी के बाद दर्ज किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। इन मौतों ने देश भर में आक्रोश को और बढ़ा दिया है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी इस ओर आकर्षित किया है और मृतकों की संख्या में वृद्धि इस बात का संकेत है कि सरकार प्रदर्शनों को दबाने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग कर रही है, जिससे मानवीय संकट गहराता जा रहा है। मानवाधिकारों का दस्तावेजीकरण करने वाले संगठनों, जैसे ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी, ईरान ह्यूमन राइट्स और हेंगाव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने पहले मृतकों की संख्या 62 बताई थी, लेकिन अब यह आंकड़ा काफी बढ़ गया है।

सरकार की कड़ी कार्रवाई और आरोप

जैसे-जैसे विरोध प्रदर्शनों की आग पूरे देश में फैली, खामेनेई सरकार ने उन्हें दबाने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और सरकार ने कई स्थानों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) को तैनात किया है, जो प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है, जिससे लोगों की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच सीमित हो गई है। इस कदम का उद्देश्य सूचना के प्रवाह को रोकना और प्रदर्शनकारियों को संगठित होने से रोकना है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है, उनका आरोप है कि अमेरिका इन विरोध प्रदर्शनों को भड़का रहा है और देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

देशव्यापी फैलाव और हिंसा

इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 7 जनवरी के बाद से ईरान में विरोध प्रदर्शन तेजी से पूरे देश में फैल गए हैं। राजधानी तेहरान से लेकर उत्तर-पश्चिमी ईरान तक, लोगों में सरकार के खिलाफ गहरा गुस्सा देखा जा रहा है और ये प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं, जिसमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बल आमने-सामने हैं। मानवाधिकार संगठनों ने बताया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 2,300 गिरफ्तारियां हुई हैं, जो सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाती हैं। इन गिरफ्तारियों में छात्र, कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हैं, जिन्हें विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

विरोध प्रदर्शनों के मूल कारण: आर्थिक संकट

ईरान में इन व्यापक विरोध प्रदर्शनों के पीछे कई गहरे आर्थिक और सामाजिक कारण हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था वर्षों से लगातार दबाव में है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हैं। ये प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं और इन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ा है। इस आर्थिक तनाव को क्षेत्रीय तनावों ने और बढ़ा दिया है, जिसमें पिछले साल जून में इजरायल के साथ हुआ 12 दिनों का युद्ध भी शामिल है। इन क्षेत्रीय संघर्षों ने देश के संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डाला है और आर्थिक सुधार की संभावनाओं को कम कर दिया है।

मुद्रास्फीति और रियाल का पतन

ईरान की मुद्रा, रियाल, में तेजी से गिरावट आई है। 2025 से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका लगभग आधा मूल्य गिर गया है, जिससे आयातित वस्तुओं। की कीमतें आसमान छू गई हैं और आम लोगों की क्रय शक्ति में भारी कमी आई है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले दिसंबर में महंगाई 42 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह अत्यधिक मुद्रास्फीति दैनिक जीवन को असहनीय बना रही है, जहां भोजन, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस आर्थिक संकट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है, जो। अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

व्यापारियों से छात्रों तक फैला आंदोलन

शुरुआत में, ये विरोध प्रदर्शन व्यापारियों द्वारा रियाल के पतन और बिगड़ती आर्थिक स्थिति के विरोध में किए गए थे। व्यापारियों ने अपनी दुकानों को बंद कर दिया और सड़कों पर उतर आए, सरकार से आर्थिक नीतियों में सुधार की मांग की। हालांकि, जल्द ही ये प्रदर्शन देश भर के यूनिवर्सिटी कैंपस और शहरों में फैल गए। छात्रों और अन्य नागरिकों ने भी आर्थिक संकट, बेरोजगारी और सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और यह आंदोलन अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जो केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार के शासन और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ भी एक बड़ी बगावत बन गया है।