ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण तेल कंपनी सऊदी अरामको पर मिसाइलों से हमला किया है और यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। सऊदी अरामको न केवल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि यह दुनिया की सबसे बड़ी कच्चे तेल की उत्पादक कंपनी भी है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ है जब कंपनी 10 मार्च को अपने तिमाही और वार्षिक वित्तीय नतीजे जारी करने की तैयारी कर रही है। ईरान द्वारा सऊदी अरब के आर्थिक हितों पर यह अब तक का सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है। इससे पहले ईरान मुख्य रूप से अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बना रहा था, लेकिन अब सऊदी अरामको जैसी महत्वपूर्ण आर्थिक इकाई को निशाना बनाना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है।
सऊदी अरामको का परिचय और वैश्विक आर्थिक स्थिति
सऊदी अरामको, जिसे आधिकारिक तौर पर सऊदी अरेबियन ऑयल कंपनी के रूप में जाना जाता है, मुख्य रूप से एक सरकारी स्वामित्व वाली इकाई है। इसका मुख्यालय सऊदी अरब के धाहरान में स्थित है। यह कंपनी दुनिया की सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में से एक है, जिसने कई मौकों पर एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों को भी पीछे छोड़ दिया है। कंपनी की वित्तीय स्थिति की पहली विस्तृत झलक 2019 में मिली थी, जब क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने इसके अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड सेल से पहले आंकड़े जारी किए थे। उस समय कंपनी ने 12 बिलियन डॉलर जुटाए थे। 2019 में ही कंपनी ने अपना आईपीओ पेश किया था, जो उस समय दुनिया का सबसे बड़ा आईपीओ था। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने कंपनी के 5 प्रतिशत हिस्से को लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यूएशन पर लिस्ट करने की योजना बनाई थी।
कंपनी का ऐतिहासिक विकास और सरकारी नियंत्रण
सऊदी अरामको की स्थापना का इतिहास 1933 से शुरू होता है, जब सऊदी अरब सरकार और कैलिफोर्निया की स्टैंडर्ड ऑयल कंपनी के बीच एक रियायत समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। कंपनी ने 1938 में अपना पहला व्यावसायिक तेल उत्पादन शुरू किया। 1940 के दशक में कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और 1949 तक कच्चे तेल का उत्पादन 500,000 बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया। वितरण को सुगम बनाने के लिए कंपनी ने ट्रांस-अरेबियन पाइपलाइन का निर्माण किया, जो दुनिया की सबसे लंबी पाइपलाइनों में से एक है। सऊदी अरब सरकार ने 1973 में कंपनी में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 1980 तक 100 प्रतिशत कर दिया गया। 1988 में इसे आधिकारिक तौर पर सऊदी अरब ऑयल कंपनी के रूप में स्थापित किया गया। वर्तमान में अमीन एच. नासिर इसके अध्यक्ष और सीईओ हैं, जबकि यासिर ओथमान अल-रुमायन इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन हैं।
बाजार पूंजीकरण और जीडीपी के साथ तुलनात्मक आंकड़े
69 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। 5 ट्रिलियन डॉलर है। दिलचस्प तथ्य यह है कि अरामको की वैल्यूएशन खुद सऊदी अरब की कुल जीडीपी से भी ज्यादा है। 31 ट्रिलियन डॉलर है, जो इसे दुनिया की 19वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाती है। 40 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। यह कंपनी न केवल तेल उत्पादन में अग्रणी है, बल्कि इसने गैर-धात्विक और क्रूड-टू-केमिकल्स उत्पादों के अनुसंधान और विकास में भी भारी निवेश किया है।
वित्तीय प्रदर्शन और आगामी रिपोर्ट का पूर्वानुमान
सऊदी अरामको 10 मार्च को अपने वर्ष 2025 के वित्तीय परिणाम जारी करने वाली है। 5 बिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। 5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। 40 बिलियन डॉलर का अनुमान लगाया गया है। 3 प्रतिशत की वृद्धि (लगभग 400,000 बैरल प्रति दिन) ने राजस्व को संतुलित करने में मदद की है। 4 डॉलर प्रति बैरल की औसत तेल कीमत के अनुमान पर आधारित है।
