ईरान: मुज्तबा खामेनेई बने नए सर्वोच्च नेता, बड़े भाई मोस्तफा दरकिनार

अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके दूसरे बेटे मुज्तबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। सैन्य अनुभव और राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें उनके बड़े भाई मोस्तफा खामेनेई पर प्राथमिकता दी गई है। यह ईरान में सत्ता का पहला वंशानुगत हस्तांतरण है।

ईरान में एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत मुज्तबा हुसैन खामेनेई को देश का तीसरा सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) नियुक्त किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद सत्ता का यह हस्तांतरण ईरान के इतिहास में पहली बार वंशानुगत आधार पर हुआ है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई अपने बड़े भाई मोस्तफा खामेनेई की तुलना में शासन और सैन्य मामलों में अधिक सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण उन्हें इस पद के लिए चुना गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सर्वोच्च नेता के रूप में खामेनेई परिवार की विरासत को आगे बढ़ाया जाएगा।

मुज्तबा खामेनेई का सैन्य अनुभव और आईआरजीसी से संबंध

मुज्तबा खामेनेई का जन्म 1969 में हुआ था, जब उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई इस्लामिक क्रांति के संघर्ष में शामिल थे। मुज्तबा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मशहद के मदरसे से प्राप्त की, लेकिन 17 वर्ष की आयु में वे सैन्य सेवा में शामिल हो गए। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध के दौरान सक्रिय रूप से मोर्चे पर लड़ाई लड़ी और सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, मुज्तबा के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के साथ अत्यंत गहरे संबंध हैं। वर्तमान आईआरजीसी प्रमुख अहमद वाहिदी के साथ उनके करीबी तालमेल को उनकी नियुक्ति का एक मुख्य कारण माना जा रहा है। उनके पास युद्ध लड़ने और सैन्य अभियानों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव है, जो ईरान की सुरक्षा संरचना में एक अनिवार्य योग्यता मानी जाती है।

मोस्तफा खामेनेई की धार्मिक भूमिका और राजनीतिक दूरी

मुज्तबा के बड़े भाई मोस्तफा खामेनेई, जो उनसे 5 साल बड़े हैं, को इस पद की दौड़ में शामिल नहीं किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, मोस्तफा की पहचान मुख्य रूप से एक धार्मिक विद्वान और इमाम के रूप में रही है। लगभग 2 वर्ष पहले उन्हें जाजन प्रांत के एक मदरसे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मोस्तफा ने अपना अधिकांश समय धार्मिक उपदेशों और धर्मशास्त्र के अध्ययन में व्यतीत किया है और राजनीतिक गलियारों और सैन्य रणनीतियों से उनकी दूरी ने मुज्तबा के लिए रास्ता साफ कर दिया। इस्लामिक परंपराओं में आमतौर पर बड़े बेटे को उत्तराधिकारी माना जाता है, लेकिन ईरान की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में सैन्य और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है।

सुप्रीम लीडर के कार्यालय में प्रशासनिक अनुभव

मुज्तबा खामेनेई पिछले कई वर्षों से अपने पिता के कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। वर्ष 2021 तक वे अनौपचारिक रूप से कामकाज देख रहे थे, लेकिन 2022 में उन्हें आधिकारिक तौर पर सर्वोच्च नेता के कार्यालय का अधिकारी नियुक्त किया गया। उनका मुख्य कार्य सुप्रीम लीडर के कार्यालय और सरकार के अन्य अंगों के बीच समन्वय स्थापित करना था। इस भूमिका ने उन्हें ईरान की जटिल सत्ता संरचना को समझने और नौकरशाही पर नियंत्रण स्थापित करने का अवसर दिया। अधिकारियों के अनुसार, मुज्तबा ने सत्ता के केंद्रों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य किया है, जिससे उनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत हुई है।

आंतरिक सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों पर नियंत्रण

मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता की तरह ही एक कट्टरपंथी विचारधारा वाला नेता माना जाता है। सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, 2009 और 2022 के दौरान ईरान में हुए बड़े जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में मुज्तबा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने सुरक्षा बलों के साथ मिलकर शासन के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की रणनीतियों पर काम किया। इस्लामिक गणराज्य की स्थिरता बनाए रखने के लिए उनकी इस कठोर कार्यशैली को सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर काफी सराहा गया है। उन्हें उन वफादारों की पहचान है जो किसी भी संकट की स्थिति में शासन के साथ खड़े रह सकते हैं।

ईरान की सत्ता संरचना में ऐतिहासिक बदलाव

मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत है। 1979 की क्रांति के बाद से यह पहला अवसर है जब सर्वोच्च नेता का पद पिता से पुत्र को हस्तांतरित किया गया है। अब तक ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन विशेषज्ञों की परिषद (असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स) द्वारा किया जाता रहा है, जो धार्मिक और राजनीतिक योग्यता को आधार मानती है। मुज्तबा के चयन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में ईरान की नीतियों में निरंतरता बनी रहेगी और आईआरजीसी का प्रभाव शासन व्यवस्था में और अधिक प्रभावी होगा।