ईरान में नए सुप्रीम लीडर के रूप में अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई की नियुक्ति के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं। इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दक्षिण एशियाई देशों, विशेष रूप से पाकिस्तान और बांग्लादेश में ईंधन संकट गहरा गया है। दोनों देशों ने ऊर्जा संरक्षण के लिए स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया है।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन और युद्ध की स्थिति
ईरान ने आधिकारिक तौर पर मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया है। इस नियुक्ति के तुरंत बाद तेहरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष के लिए तैयार है। अधिकारियों के अनुसार, ईरान ने इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर अपने हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है। बहरीन ने ईरान पर एक महत्वपूर्ण डीसेलिनेशन प्लांट पर हमला करने का आरोप लगाया है, जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे पर युद्ध का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है और बहरीन की राष्ट्रीय तेल कंपनी ने अपनी रिफाइनरी में आग लगने के बाद शिपमेंट के लिए 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर दिया है।
वैश्विक तेल बाजार और G7 की प्रतिक्रिया
50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो बाद में 9% की वृद्धि के साथ 101 डॉलर के स्तर पर कारोबार करती देखी गई। 48 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू गया। कीमतों में इस उछाल के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संकेत दिया कि G7 देश बाजार को स्थिर करने के लिए अपने आपातकालीन तेल भंडार का उपयोग कर सकते हैं। हालांकि, बाद में G7 की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि फिलहाल रणनीतिक भंडार का उपयोग नहीं किया जाएगा। फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के अनुसार, समूह बाजार की स्थिति पर नजर रख रहा है और आवश्यकता पड़ने पर कदम उठाने के लिए तैयार है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश में आपातकालीन उपाय
ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की कमी के कारण पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारी कटौती वाले बचत पैकेज की घोषणा की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में शैक्षणिक संस्थान दो सप्ताह के लिए बंद कर दिए गए हैं और ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाया गया है। सरकारी वाहनों के बेड़े में 60% की कमी की गई है और ईंधन कोटे में 50% की कटौती लागू की गई है। इसी तरह, बांग्लादेश सरकार ने भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सोमवार से सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बिजली की खपत कम करना और सड़कों पर ट्रैफिक कम करके ईंधन की बचत करना है।
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर प्रभाव और चीन की चिंता
ईरान से होने वाले तेल निर्यात पर निर्भर देशों में चिंता बढ़ गई है। 6 मिलियन बैरल तेल निर्यात करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है। दक्षिण कोरिया में भी ईंधन स्टेशनों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है और होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है, वहां सैन्य गतिविधियों के कारण टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों ने निर्यात क्षमता में कमी के कारण उत्पादन में कटौती की है।
भारत में स्थिति और घरेलू आपूर्ति का विवरण
भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत पर इस वैश्विक संकट का तत्काल कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है। भारत ने रूस और अन्य वैकल्पिक स्रोतों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की है, जिससे घरेलू बाजार में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर कुछ चिंताएं सामने आई हैं। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने रिपोर्ट दी है कि कुछ क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। एसोसिएशन के अनुसार, यदि गैस की आपूर्ति जल्द बहाल नहीं की गई, तो होटलों के संचालन पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, केंद्र सरकार ने तेल की कीमतों में किसी भी तत्काल बढ़ोतरी की संभावना से इनकार किया है और स्थिति को नियंत्रण में बताया है।
