फ्लोरिडा के डोराल में मीडिया से बात करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का संकेत दिया है और ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका कुछ देशों पर लगे तेल प्रतिबंधों को हटाने जा रहा है ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ सके और कीमतों में कमी आए। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष अपने अंतिम चरण में है और बहुत जल्द समाप्त हो जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के स्तर को छू गई हैं, जिससे अमेरिका सहित कई विकसित और विकासशील देशों में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया है।
प्रतिबंधों में ढील और वैश्विक तेल बाजार
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि तेल और गैस की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक उपभोक्ताओं पर भारी बोझ डाला है। उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने तक कुछ देशों से प्रतिबंध हटाना आवश्यक हो गया है। हालांकि ट्रंप ने उन देशों के नामों का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया जिन पर से प्रतिबंध हटाए जाएंगे, लेकिन व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार रूस पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता को बढ़ाना है ताकि मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम किया जा सके। सोमवार को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि की गई थी कि अमेरिकी प्रशासन रूसी ऊर्जा निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को नरम करने की योजना बना रहा है।
रूस और ईरान के प्रति बदलता कूटनीतिक रुख
अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले को रूस और ईरान के प्रति एक बड़े कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की गई। ईरान के संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि वहां संघर्ष लगभग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं, विशेष रूप से उसकी नौसेना और वायु सेना, अब उस स्थिति में नहीं हैं कि वे लंबे समय तक प्रतिरोध कर सकें। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका वहां अपनी उपस्थिति बनाए रखेगा और यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य कार्रवाई को और तेज किया जा सकता है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के साथ एक छोटा टकराव संभव है, लेकिन समग्र युद्ध की स्थिति जल्द ही समाप्त हो जाएगी।
G7 देशों की आपातकालीन रणनीति और मूल्य नियंत्रण
वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में आए उछाल को देखते हुए दुनिया की सात सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 ने भी सक्रियता दिखाई है। सोमवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, G7 देशों के प्रतिनिधि अपने आपातकालीन तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) से कच्चा तेल जारी करने की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं। इस संभावित कार्रवाई की खबरों के बाद बाजार में कुछ स्थिरता देखी गई है। शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन G7 की सक्रियता और ट्रंप के बयान के बाद कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार, आपातकालीन भंडार से तेल जारी करने का उद्देश्य सट्टेबाजी को रोकना और बाजार में विश्वास बहाल करना है।
भारत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित प्रभाव
अमेरिका के इस नीतिगत बदलाव का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। अमेरिका ने पहले ही भारत को बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे रखी है। अब प्रतिबंधों में और ढील मिलने से भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान हो सकता है। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। यदि रूस से तेल निर्यात पर प्रतिबंध और कम होते हैं, तो इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और कमी आ सकती है, जिसका लाभ भारत को अपने आयात बिल को कम करने में मिलेगा।
मध्य पूर्व में सैन्य स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा
मध्य पूर्व में जारी तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान पर बमबारी और सैन्य दबाव को तब तक जारी रखा जा सकता है जब तक कि पूर्ण स्थिरता सुनिश्चित न हो जाए। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अब प्रभावी संचार या वायु रक्षा प्रणाली नहीं बची है, जिससे युद्ध के जल्द समाप्त होने की उम्मीद है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है ताकि तेल के उत्पादन और परिवहन में कोई बाधा न आए। ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका अपनी ऊर्जा स्वतंत्रता और वैश्विक बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
Trump: "We're also waiving certain oil-related sanctions to reduce prices. So we have sanctions on some countries, we're gonna take those sanctions off until this straightens out. Who knows -- maybe we won't have to put them on, there will be so much peace." pic.twitter.com/qseD3VmgDi
— Aaron Rupar (@atrupar) March 9, 2026
