ट्रंप का ईरान पर कड़ा रुख: युद्ध खत्म करने की जल्दी नहीं, परमाणु हमले पर दी बड़ी जानकारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने ईरानी सेना को पराजित बताते हुए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार किया और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ईरान के साथ चल रहे तनाव पर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह ईरान के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया लंबी खिंच रही है और अमेरिका खुद को किसी निश्चित समय-सीमा में बांधना नहीं चाहता है। राष्ट्रपति के अनुसार, अमेरिका ने सैन्य रूप से महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली है और अब प्रशासन यह देख रहा है कि क्या कोई समझौता संभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं होता है, तो हमले फिर से शुरू किए जा सकते हैं।

ईरानी सैन्य शक्ति और परमाणु हथियारों पर रुख

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य स्थिति पर दावा करते हुए कहा कि उनकी सेना पूरी तरह से पराजित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायु सेना खत्म हो चुकी है और उनके विमानरोधी उपकरण भी नष्ट हो गए हैं। " परमाणु हथियारों के मुद्दे पर उन्होंने साफ किया कि फिलहाल वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार के इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हथियारों का उपयोग किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के पास परमाणु बम नहीं हो सकता और न ही उन्हें कभी यह मिलेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य कार्रवाई और टैंकर जब्ती

अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। राष्ट्रपति ने बताया कि वहां बारूदी सुरंगें हटाने का काम भी बढ़ाया गया है। इसी बीच, अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने हिंद महासागर में एक और ईरानी टैंकर जब्त किया है और यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन कार्गो जहाजों पर किए गए हमलों के बाद हुई है। इस तनाव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाला तेल व्यापार लगभग पूरी तरह रुक गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

परमाणु समझौता और आर्थिक नाकाबंदी

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति ओबामा द्वारा किए गए परमाणु समझौते की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने इसे इसलिए खत्म किया क्योंकि यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने का रास्ता दे रहा था। उन्होंने जनरल सुलेमानी का जिक्र करते हुए उन्हें एक 'प्रतिभाशाली जनरल' बताया और कहा कि शायद उनके खात्मे के बिना इतनी प्रगति संभव नहीं होती और ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका द्वारा लगाई गई आर्थिक नाकाबंदी 100% प्रभावी है और ईरान की आर्थिक स्थिति वर्तमान में अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और बातचीत चल रही है, लेकिन वहां नेतृत्व का संकट है और वे आपस में बुरी तरह लड़ रहे हैं।

होर्मुज खोलने की शर्तें और नेतृत्व का संकट

पश्चिम एशिया के संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि वह समझौता चाहते हैं, लेकिन इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं करेंगे और उन्होंने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर वर्तमान में अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है और यह अभी बंद है। ट्रंप ने खुलासा किया कि ईरानी पक्ष ने होर्मुज खोलने का प्रस्ताव दिया था, जिससे उनके प्रशासन के लोग खुश थे, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से अस्वीकार कर दिया और ट्रंप ने तर्क दिया कि यदि होर्मुज खोला जाता है, तो ईरान प्रतिदिन 500 मिलियन डॉलर कमाएगा, जो वह मामला सुलझने तक नहीं चाहते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मार्ग तभी खुलेगा जब कोई ठोस समझौता हो जाएगा।