Iran Protests / ईरान में सत्ता के गलियारों में भगदड़: बड़े नेता और अधिकारी फ्रांस का वीजा लेने में जुटे

ईरान में गहराते आर्थिक संकट और हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच, फ्रांस के अख़बार ले फिगारो ने दावा किया है कि कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी अपने परिवारों के लिए फ्रांस का वीजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह सत्ता के गलियारों में बढ़ती बेचैनी का संकेत है, जबकि सड़कों पर हिंसा जारी है और दो पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है।

ईरान में मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल ने देश के भीतर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है। आर्थिक संकट की बढ़ती गंभीरता और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने के कारण, अब सत्ता के शीर्ष स्तर पर भी बेचैनी और अनिश्चितता का माहौल साफ तौर पर देखा जा रहा है। फ्रांस के प्रतिष्ठित अख़बार ले फिगारो की एक हालिया रिपोर्ट ने ईरान की आंतरिक स्थिति को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।

सत्ता के गलियारों में बढ़ती बेचैनी

ले फिगारो की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी अपने परिवारों। के लिए फ्रांस का वीजा हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब ईरान में आर्थिक स्थिति। लगातार बिगड़ रही है और सरकार विरोधी प्रदर्शन पूरे देश में फैल चुके हैं। इन प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप ले लिया है, जिससे देश में अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है। अधिकारियों द्वारा अपने परिवारों के लिए विदेशी वीजा की तलाश करना, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि। वे देश के भविष्य को लेकर आशंकित हैं और संभावित रूप से देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि सत्ता के भीतर भी हालात को लेकर विश्वास डगमगाने लगा है।

फ्रेंच मीडिया का दावा और पत्रकार रजावी की रिपोर्ट

फ्रेंच मीडिया में यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान में हालात। लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और सड़कों पर सरकार के खिलाफ गुस्सा फूट रहा है। ले फिगारो के मुताबिक, ईरानी-फ्रांसीसी पत्रकार इमैनुएल रजावी ने इस दावे को और पुख्ता किया है। रजावी ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में ईरान के सुधारवादी गुट से जुड़े कई बड़े नेता, यहां तक कि संसद (इस्लामिक असेंबली) के अध्यक्ष भी अपने परिवारों के लिए फ्रांसीसी वीज़ा हासिल करने की कोशिश में लगे हुए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन नेताओं ने पेरिस में एक वकील के जरिए वीजा प्रक्रिया शुरू की है। यह घटनाक्रम ईरान के भीतर हालात को लेकर सत्ता के गलियारों में गहरे अविश्वास और अनिश्चितता का प्रतीक माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि शीर्ष नेतृत्व भी देश की वर्तमान और भविष्य की स्थिति को लेकर चिंतित है।

सड़कों पर हिंसक होते विरोध प्रदर्शन

ईरान में विरोध प्रदर्शन अब तेजी से हिंसक होते जा रहे हैं, जिससे सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें बढ़ गई हैं। बुधवार को देश के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान और बलूचिस्तान में एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई और मारे गए अधिकारी की पहचान महमूद हकीकत के रूप में हुई है। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक अज्ञात हमलावर चलती गाड़ी से झुककर लगातार फायरिंग करता दिख रहा है। गोलियां लगने के बाद पुलिस वाहन सड़क से उतरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह पिछले दो दिनों में पुलिसकर्मियों की दूसरी हत्या है, जो स्थिति की गंभीरता को उजागर करती है। इससे पहले, पश्चिमी ईरान के इलाम प्रांत में पुलिस अधिकारी एहसान। अगाजानी की झड़प के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि विरोध प्रदर्शन अब एक खतरनाक मोड़ ले चुके हैं, जहां जान-माल का नुकसान हो रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ईरान की चेतावनी

ईरान में बिगड़ते हालात पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि अगर सुरक्षा बल उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं तो अमेरिका उनके साथ खड़ा होगा। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिया है, जिससे ईरान पर बाहरी दबाव बढ़ गया है। वहीं, ईरान के मुख्य न्यायाधीश गोलामहुसैन मोहसनी एजई ने देश के भीतर से एक सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक के दुश्मनों की मदद करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी उन लोगों के लिए है जो सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं या उन्हें समर्थन दे रहे हैं, और यह दर्शाता है कि ईरानी सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।