ईरान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए ओमान के साथ एक नए समुद्री मार्ग पर सहमति बना ली है। यह महत्वपूर्ण समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हालांकि, ईरान ने इस बात को भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। ईरान का मानना है कि क्षेत्र में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी और सैन्य गतिविधियां अब भी तनाव का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं।
बातचीत का अंतिम चरण और भौगोलिक समन्वय
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस समझौते के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ओमान के साथ नए समुद्री मार्ग को लेकर चल रही बातचीत अब अपने आखिरी दौर में है। उन्होंने यह भी साझा किया कि दोनों देशों के बीच जियोग्राफिकल कॉर्डिनेट्स यानी भौगोलिक समन्वय पर पूरी तरह सहमति बन गई है। हालांकि, बकाई ने इस समझौते की बारीकियों और तकनीकी विवरणों के बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
अमेरिका पर सुरक्षा व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप
ईरान ने इस समझौते के बावजूद सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं और प्रवक्ता बकाई ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को इस समझौते के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। उनका आरोप है कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी कर रखी है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की आक्रामक सैन्य गतिविधियां और उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंध वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बड़ी बाधा हैं। फिलहाल, ईरान के इन दावों और पूरे प्रस्ताव पर अमेरिका और ओमान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और पिछला तनाव
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका और इजरायल द्वारा फरवरी में ईरान पर किए गए हमलों के बाद तेहरान ने इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे और हालांकि, बाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते के बाद इसे खोल दिया गया था। लेकिन जुलाई महीने में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव फिर से बढ़ गया, जिसके बाद ईरान ने एक बार फिर हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार यानी 4 अगस्त को ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बहुत जल्द नहीं खोला गया, तो ईरान को इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि जहाजों की आवाजाही बहाल करने को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। हालांकि, ईरान लगातार इस बात पर कायम है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं कर रहा है।
अस्थायी व्यवस्था और समय सीमा
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी समाचार एजेंसी इरना को बताया कि ओमान के साथ तय किया गया यह नया समुद्री मार्ग केवल एक अस्थायी व्यवस्था होगी। उन्होंने संकेत दिया कि यह मार्ग 2 से 4 महीने तक ही लागू रह सकता है। हालांकि, उन्होंने भी इस मार्ग के संचालन से जुड़ी विस्तृत तकनीकी जानकारी साझा नहीं की है।
ट्रांजिट शुल्क को लेकर बना हुआ है विवाद
ईरान और अमेरिका के बीच इस समय सबसे बड़ा विवाद जहाजों से लिए जाने वाले ट्रांजिट शुल्क को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान चाहता है कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज अपने माल की कुल कीमत का 5 से 7 प्रतिशत शुल्क के रूप में भुगतान करें। दूसरी ओर, ओमान इस शुल्क को करीब 3 प्रतिशत रखने के पक्ष में है। वहीं, अमेरिका किसी भी तरह का शुल्क लगाने के पूरी तरह खिलाफ है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों पर ईरान का नियंत्रण और अधिक बढ़ सकता है।
