ईरान में बड़ा फेरबदल: खामेनेई ने अली लारिजानी को सौंपे प्रमुख अधिकार

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को व्यापक सैन्य और कूटनीतिक अधिकार सौंपे हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह कदम राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की शक्तियों को सीमित करता है और युद्ध की तैयारियों को दर्शाता है।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेहरान से सत्ता के गलियारों में बड़े बदलाव की खबरें सामने आ रही हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश की सुरक्षा और सैन्य कमान में व्यापक फेरबदल किया है और इस नए आदेश के तहत, राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख (NSA) अली लारिजानी को असाधारण शक्तियां प्रदान की गई हैं। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित युद्ध की आशंकाओं के मद्देनजर अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, खामेनेई ने यह कदम देश की रक्षा प्रणाली को अधिक केंद्रित और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उठाया है।

अली लारिजानी को मिली व्यापक शक्तियां

ईरानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारिजानी अब देश के सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में से एक बनकर उभरे हैं। सुप्रीम लीडर के आदेश के बाद, लारिजानी के पास अब प्रमुख सुरक्षा, सैन्य और कूटनीतिक अभियानों के संचालन का सीधा अधिकार है। उनके कार्यक्षेत्र में अब न केवल रक्षात्मक रणनीतियां शामिल हैं, बल्कि वे युद्धकालीन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए भी अधिकृत किए गए हैं और अधिकारियों के अनुसार, लारिजानी अब सीधे तौर पर रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स और अन्य सैन्य शाखाओं के साथ समन्वय कर रहे हैं। उन्हें परमाणु वार्ता से लेकर रूस, कतर और ओमान जैसे सहयोगी देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की भूमिका में बदलाव

इस नए शक्ति संतुलन ने ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख सुरक्षा और सैन्य निर्णयों में राष्ट्रपति की भूमिका को प्रभावी रूप से सीमित कर दिया गया है। खामेनेई के इस फैसले का अर्थ है कि अब युद्ध और शांति से जुड़े बड़े फैसले सीधे सुप्रीम लीडर के कार्यालय और लारिजानी के माध्यम से लिए जाएंगे। यह प्रशासनिक बदलाव इस बात का संकेत है कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व वर्तमान स्थिति को एक सामान्य राजनीतिक परिस्थिति के बजाय एक आपातकालीन युद्धकालीन स्थिति के रूप में देख रहा है और राष्ट्रपति कार्यालय को अब मुख्य रूप से घरेलू प्रशासन और आर्थिक मुद्दों तक सीमित रखने के संकेत मिले हैं।

सैन्य तैयारियों और मिसाइल प्रणालियों की तैनाती

जंग की आहट को देखते हुए ईरान ने अपनी सैन्य मशीनरी को उच्च सतर्कता (High Alert) पर रखा है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपनी उन्नत मिसाइल प्रणालियों को देश के विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। इसमें भूमिगत मिसाइल बेस और मोबाइल लॉन्चर शामिल हैं। सैन्य अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह तैनाती किसी भी संभावित हवाई हमले के जवाब में त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए की गई है और इसके साथ ही, ईरान ने अपने रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा घेरे तैयार किए हैं, ताकि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को सुरक्षित रखा जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती गतिविधियां

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान ने अपनी नौसैनिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। हाल ही में ईरान ने इस क्षेत्र में सय्याद-3जी मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसे अमेरिकी और इजरायली खेमे के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, और यहां ईरान की बढ़ती सक्रियता अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है। लारिजानी के नेतृत्व में ईरानी नौसेना ने इस क्षेत्र में निरंतर सैन्य अभ्यास शुरू किए हैं, जिसका उद्देश्य समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को रोकना है।

उत्तराधिकार योजना और आंतरिक सुरक्षा के उपाय

सुप्रीम लीडर खामेनेई ने न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि शासन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक योजनाएं तैयार की हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कई स्तरों पर उत्तराधिकार की एक जटिल व्यवस्था (Succession Plan) लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व को किसी हमले में निशाना बनाया जाता है, तो भी शासन और सैन्य कमान का ढांचा बना रहे और इसके अतिरिक्त, घरेलू स्तर पर किसी भी संभावित अशांति को दबाने के लिए सुरक्षा बलों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। आंतरिक सुरक्षा बलों को युद्धकाल के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विद्रोह को रोकने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।