ईरान ने इटली को दी कड़ी चेतावनी, अमेरिका की मदद को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

ईरान ने इटली द्वारा अमेरिका को दी गई तकनीकी और लॉजिस्टिकल सहायता की कड़ी निंदा की है। इटली के विदेश मंत्री ने सैन्य भागीदारी से इनकार किया है, लेकिन ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और युद्ध में मिलीभगत करार दिया है।

ईरान और इटली के बीच कूटनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को दी गई सहायता के लिए इटली की कड़ी आलोचना की। ईरान ने स्पष्ट किया है कि इटली गलत तर्क देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब इटली ने स्वीकार किया कि उसने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में तो हिस्सा नहीं लिया, लेकिन अमेरिका को तकनीकी और लॉजिस्टिकल सहायता प्रदान की थी। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और एक अवैध युद्ध में सीधी भागीदारी करार दिया है।

ईरान ने इटली के तर्कों को नकारा

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इटली के दावों पर कड़ा प्रहार किया और बकाई ने कहा कि इटली का यह दावा कि उसने सैन्य कार्रवाई में भाग नहीं लिया, लेकिन तकनीकी सहायता दी, एक बड़ा विरोधाभास है। उन्होंने इसे एक गलत तर्क बताया जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए एक गलत कृत्य की जिम्मेदारी से बचना है। ईरान का मानना है कि हमलावरों को किसी भी प्रकार की मदद देना, चाहे वह तकनीकी हो या लॉजिस्टिकल, उन्हें गैर-कानूनी युद्ध छेड़ने में सक्षम बनाता है।

ईरानी प्रवक्ता ने आगे कहा कि हमलावरों को सहायता प्रदान करना स्पष्ट रूप से एक अवैध युद्ध में योगदान देने के समान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इटली द्वारा दी गई इस सहायता ने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के आक्रामक रुख को आसान बनाया है। ईरान ने सार्वजनिक रूप से इस बात की निंदा की है कि इटली एक तरफ सैन्य भागीदारी से इनकार कर रहा है और दूसरी तरफ उस सहायता को स्वीकार कर रहा है जिसने हमले को संभव बनाया।

विदेश मंत्रियों के बीच टेलीफोन पर बातचीत

इस तीखी प्रतिक्रिया से पहले, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तार से बातचीत की थी। इस बातचीत के दौरान ताजानी ने इटली का पक्ष रखने की कोशिश की। उन्होंने अराघची को आश्वासन दिया कि इटली ने कभी भी ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लिया है। ताजानी ने यह भी साफ किया कि इटली ने अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध या किसी हमले के लिए करने की अनुमति नहीं दी है।

इटली के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके देश ने अमेरिका के साथ हुई अपनी संधियों और समझौतों का पूरी तरह से पालन किया है। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि इटली की भूमिका केवल अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों तक सीमित थी और उसका उद्देश्य ईरान के साथ सीधे संघर्ष में पड़ना नहीं था और हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन स्पष्टीकरणों को पर्याप्त नहीं माना और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी बताया।

होर्मुज स्ट्रेट और आर्थिक हितों पर चर्चा

बातचीत के दौरान केवल सैन्य मुद्दों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि आर्थिक और व्यापारिक चिंताओं को भी उठाया गया। एंटोनियो ताजानी ने ईरानी विदेश मंत्री से होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से खोलने की अपील की। इटली के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि उसके कई कार्गो जहाज इस क्षेत्र में अटके हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है और इटली चाहता है कि उसके व्यापारिक जहाज बिना किसी बाधा के वहां से गुजर सकें।

ताजानी ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापारिक मार्गों का खुला रहना दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए आवश्यक है। इटली अपने कार्गो जहाजों की सुरक्षा और उनकी सुचारू आवाजाही को लेकर चिंतित है, जिसके लिए उसने ईरान से सहयोग की मांग की है।

कूटनीतिक संबंधों की बहाली के संकेत

तनाव के बावजूद, इटली ने बातचीत के रास्ते खुले रखने की इच्छा जताई है। ताजानी ने उल्लेख किया कि तेहरान में इटली के दूतावास का फिर से खुलना दोनों देशों के बीच बातचीत का एक मजबूत संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे न केवल राजनीतिक संवाद बढ़ेगा, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी। इटली का मानना है कि दूतावास के माध्यम से निरंतर संपर्क बनाए रखना वर्तमान गलतफहमियों को दूर करने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है।