Ali Khamenei News / ईरान में बेकाबू हालात: सुप्रीम लीडर खामेनेई रूस भागने की कर रहे प्लानिंग

ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच एक खुफिया रिपोर्ट सामने आई है कि अगर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का शासन गिरता है, तो वह मॉस्को भाग सकते हैं. यह योजना उनके करीबी सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ देश छोड़ने की है, जिसमें उनका बेटा मोजतबा भी शामिल है.

ईरान में राजनीतिक और सामाजिक अशांति अपने चरम पर पहुंच गई है, जहां दिन-ब-दिन विरोध प्रदर्शनों की आग और भी भड़कती जा रही है. इस गंभीर स्थिति के बीच, एक चौंकाने वाली खुफिया रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपने शासन के पतन की स्थिति में मॉस्को भागने की योजना बनाई है. यह खबर ऐसे समय में आई है जब ईरान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है और जनता का गुस्सा सड़कों पर उमड़ रहा है.

बढ़ते विरोध प्रदर्शन और खामेनेई का प्लान-बी

ईरान में पिछले कुछ समय से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े विद्रोह का रूप ले चुके हैं. द टाइम्स के साथ साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान में खामेनेई का शासन गिर जाता है, तो 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता तेहरान छोड़कर अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ देश से निकल जाएंगे और यह कदम तब उठाया जाएगा जब उनकी सुरक्षा एजेंसियां बढ़ते प्रदर्शनों को दबाने में नाकाम रहती हैं या अशांति के बीच उनका साथ छोड़ देती हैं. यह स्थिति ईरान के लिए एक अभूतपूर्व राजनीतिक संकट का संकेत देती है, जहां सर्वोच्च नेता को अपने अस्तित्व के लिए एक 'प्लान-बी' पर विचार करना पड़ रहा है.

मॉस्को क्यों है पसंदीदा ठिकाना?

खुफिया सूत्र ने ब्रिटिश अखबार को बताया कि खामेनेई के लिए प्लान बी यह है कि वह अपने बेहद करीबी सहयोगियों और परिवार के साथ, जिनमें उनका बेटा और नामित उत्तराधिकारी मोजतबा भी शामिल है, देश छोड़ सकते हैं. इस योजना के तहत, वे अपने करीबी लगभग 20 सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ ईरान छोड़ सकते हैं. मॉस्को को उनके संभावित ठिकाने के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि रूस के साथ ईरान के गहरे रणनीतिक संबंध हैं. दिसंबर 2024 में, सीरिया के तत्कालीन राष्ट्रपति बशर अल-असद, जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और खामेनेई दोनों के सहयोगी थे, विद्रोहियों के सत्ता पर कब्जे के बाद मॉस्को भाग गए थे. यह घटना खामेनेई के लिए एक मिसाल के तौर पर देखी जा सकती. है, जो उन्हें रूस में शरण लेने के लिए प्रेरित कर सकती है.

भागने की रणनीति और विदेशों में संपत्तियां

सूत्र के अनुसार, अगर खामेनेई को भागने की जरूरत महसूस होती है, तो उन्होंने तेहरान से बाहर निकलने का एक रास्ता पहले से तय कर रखा है और इस योजना में विदेशों में संपत्तियां और प्रॉपर्टी जुटाना शामिल है, ताकि सुरक्षित रूप से निकलने की व्यवस्था की जा सके. यह दर्शाता है कि यह एक आकस्मिक योजना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, जिसे लंबे समय से तैयार किया जा रहा है और यह भी बताया गया है कि जून में इजराइल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद खामेनेई अब मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गए हैं, जिससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और शासन पर उनकी पकड़ पर सवाल उठ रहे हैं.

देशव्यापी प्रदर्शनों का बढ़ता दायरा

ईरान में बढ़ते आर्थिक संकट, महंगाई और गिरती करेंसी के चलते लोगों का गुस्सा फूटा है. तेहरान में दुकानदारों की हड़ताल के साथ शुरू हुए ये प्रदर्शन देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए. लोग महंगाई के खिलाफ सड़कों पर निकल आए हैं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. कई जगहों पर आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं, जो जनता के आक्रोश की गंभीरता को दर्शाती हैं. ये प्रदर्शन पिछले तीन सालों में सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन माने जा रहे हैं, जो ईरान की अर्थव्यवस्था की बदहाली और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से कमजोर स्थिति में होने का परिणाम हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि शासन के खिलाफ बढ़ते और लगातार अधिक हिंसक होते प्रदर्शनों के बीच देश को 'सर्वाइवल मोड' में धकेल दिया गया है. मानवाधिकार संगठनों ने रविवार को बताया कि ईरान में एक हफ्ते से जारी अशांति के दौरान कम से कम 16 लोगों की मौत हो चुकी है. पूरे हफ्ते मौतों और गिरफ्तारियों की खबरें सामने आई हैं, जो स्थिति की गंभीरता को उजागर करती हैं और नॉर्वे स्थित कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने बताया कि प्रदर्शनों की शुरुआत से अब तक कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के नेटवर्क HRANA के अनुसार कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है और 582 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और यह आंकड़े सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही कठोर कार्रवाई को दर्शाते हैं.

राष्ट्रपति पेजेशकियान का संवेदनशील रुख

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने गृह मंत्रालय से. प्रदर्शनकारियों के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार रवैया अपनाने को कहा है. सरकारी मीडिया में प्रकाशित उनके बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि समाज को जोर-जबरदस्ती के तरीकों से न तो समझाया जा सकता है और न ही शांत किया जा सकता है. यह बयान सरकार के भीतर भी प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर मतभेद का संकेत देता है. राष्ट्रपति का यह रुख जनता के गुस्से को शांत करने और स्थिति को. और बिगड़ने से रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

ट्रंप की चेतावनी और ईरान का जवाब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की गई तो वह उनकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं. शुक्रवार को उन्होंने कहा, 'हम पूरी तरह तैयार हैं', हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस तरह की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं और इस चेतावनी के बाद ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की धमकियां दी गईं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी कहा कि ईरान दुश्मन के आगे झुकेगा नहीं. यह स्थिति ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को और बढ़ा सकती है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा बढ़ जाएगा. ईरान के आंतरिक संकट का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरा असर पड़ रहा है, और खामेनेई के रूस भागने की योजना की खबर इस भू-राजनीतिक नाटक में एक नया मोड़ ला सकती है.