ईरान के नए सुप्रीम लीडर का चयन: इजरायल की चयन प्रक्रिया पर हमले की चेतावनी

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने नए सुप्रीम लीडर के नाम पर सहमति बना ली है। इस बीच, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने चेतावनी दी है कि चयन प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति उनका निशाना होगा। अमेरिका ने भी नेतृत्व चयन में अपनी भूमिका की मांग की है।

ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति को लेकर चल रही हलचल के बीच इजरायल ने एक बड़ी सैन्य चेतावनी जारी की है। तेहरान से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने देश के अगले सर्वोच्च नेता के नाम पर सहमति बना ली है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है और इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने स्पष्ट किया है कि वे इस चयन प्रक्रिया में शामिल किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेंगे। यह तनावपूर्ण स्थिति ऐसे समय में उत्पन्न हुई है जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। 28 फरवरी को हुए हमले के बाद से ईरान का नेतृत्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है।

इजरायल डिफेंस फोर्सेज की कड़ी चेतावनी

इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने सोशल मीडिया के माध्यम से फारसी भाषा में एक आधिकारिक संदेश जारी किया है। इस संदेश में इजरायली सेना ने सीधे तौर पर उन अधिकारियों को चेतावनी दी है जो नए सुप्रीम लीडर के चयन के लिए आयोजित होने वाली बैठकों में भाग लेने वाले हैं। इजरायली सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सरकार हर उस उत्तराधिकारी और उस व्यक्ति का पीछा करेगी जो नया नेतृत्व नियुक्त करने की कोशिश करेगा। IDF ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चयन प्रक्रिया की बैठक में शामिल होने वाले किसी भी व्यक्ति को एक वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। द जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह ईरान के अगले नेतृत्व को स्थापित होने से रोकने के लिए अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स की चयन प्रक्रिया

तेहरान स्थित मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने नए सुप्रीम लीडर के नाम पर बहुमत के साथ अपनी सहमति दर्ज कर ली है। असेंबली के सदस्य मीरबहागेरी ने मीडिया को जानकारी दी कि चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण अभी तक औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि जब तक नए नेता का नाम सार्वजनिक नहीं होता, तब तक एक विशेष नेतृत्व परिषद देश के प्रशासनिक और धार्मिक कार्यों का संचालन कर रही है। असेंबली के सदस्यों का कहना है कि वे देश की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं, हालांकि बाहरी खतरों ने इस प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है।

अमेरिका का रुख और राष्ट्रपति ट्रंप का बयान

इस नेतृत्व परिवर्तन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपनाया है और राष्ट्रपति ट्रंप ने कई अवसरों पर यह स्पष्ट किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर के चयन में अमेरिका की सहमति और हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, वे किसी भी ऐसे नेतृत्व का समर्थन नहीं करेंगे जो क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर चलता हो। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह ईरान में एक ऐसे शासन की अपेक्षा करता है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और शांति समझौतों के प्रति जवाबदेह हो और राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वाशिंगटन ईरान के भविष्य के नेतृत्व को लेकर बेहद सतर्क है और वह किसी भी प्रतिकूल चयन पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर सकता है।

मोजतबा खामेनेई के नाम पर आधिकारिक स्पष्टीकरण

सोशल मीडिया और इजरायली मीडिया में चल रही उन खबरों को ईरानी सरकार ने खारिज कर दिया है जिनमें मोजतबा खामेनेई को उनके पिता का उत्तराधिकारी बताया जा रहा था। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से स्पष्ट किया कि मीडिया में चल रही इन रिपोर्टों का कोई आधिकारिक स्रोत नहीं है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उम्मीदवारों के बारे में चल रही सभी खबरें निराधार हैं और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा लिए गए निर्णय को उचित समय पर ही सार्वजनिक किया जाएगा। इजरायली मीडिया ने दावा किया था कि मोजतबा को गुप्त रूप से चुन लिया गया है, लेकिन तेहरान ने इन दावों को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा करार दिया है।

युद्ध की स्थिति और नेतृत्व परिषद का संचालन

तस्नीम न्यूज एजेंसी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में ईरानी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि देश में वर्तमान में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। सरकारी टेलीविजन पर एक अधिकारी ने बताया कि 28 फरवरी को हुए हमले के बाद से स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, जिसके कारण नए नेता की घोषणा में देरी हो रही है। अधिकारी ने वर्तमान संकट की तुलना अयातुल्ला खुमैनी के निधन के बाद के समय से की और कहा कि उस समय शांति होने के कारण नियुक्ति शीघ्र हो गई थी, लेकिन वर्तमान में युद्ध के कारण प्रक्रिया में सावधानी बरती जा रही है। वर्तमान में देश का कामकाज एक अंतरिम नेतृत्व परिषद द्वारा चलाया जा रहा है जो सैन्य और नागरिक दोनों मोर्चों पर निर्णय ले रही है।