ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी, पाकिस्तान और तुर्किये से कहा- दोबारा हमला न हो

ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरानी ठिकानों पर हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के नेताओं से बात कर क्षेत्रीय अस्थिरता पर चर्चा की। यह तनाव डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद बढ़ा है।

ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक बार फिर से बेहद कड़ी और स्पष्ट चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिकी सेना ने ईरानी ठिकानों पर किसी भी प्रकार के नए हमले किए, तो उसे ईरान की तरफ से बहुत ही गंभीर और कड़े जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा। इस ताजा चेतावनी के बाद पूरे मध्य-पूर्व यानी मिडिल ईस्ट क्षेत्र में युद्ध और तनाव का खतरा काफी बढ़ गया है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन हालिया बयानों के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर सैन्य हमले करने की बात कही थी। ईरानी नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि वे अपनी रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की धमकी और बातचीत पर संशय

ईरान की यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान के साथ चल रही बातचीत से अब उनका भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से और अधिक हमलों की धमकी दी थी। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि यदि जरूरत पड़ी, तो अमेरिका उन पर हमला जरूर करेगा। हालांकि, एक तरफ ट्रंप हमले की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्होंने एक समझौते का दावा भी किया है और ट्रंप के इन विरोधाभासी बयानों ने क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है और ईरान को अपनी सुरक्षा रणनीति पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है।

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के साथ कूटनीतिक चर्चा

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इस मुद्दे पर क्षेत्रीय देशों के साथ सक्रिय रूप से कूटनीतिक संपर्क साधा है। अरागची ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर, तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ अलग-अलग फोन पर विस्तार से बातचीत की। अरागची के आधिकारिक टेलीग्राम अकाउंट के माध्यम से दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान और तुर्किये के अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि ईरान अपनी संप्रभुता पर होने वाली किसी भी आक्रामकता का कड़ा जवाब देगा। उन्होंने अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे अस्थिर करने वाले कदमों और उससे पैदा होने वाले क्षेत्रीय अस्थिरता के खतरों पर भी चर्चा की।

क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर ईरान का रुख

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के साथ हुई बातचीत में अरागची ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका या इजराइल ईरान पर कोई हमला करते हैं, या यदि क्षेत्र के अन्य देश ऐसे किसी सैन्य अभियान में शामिल होते हैं या सहयोग करते हैं, तो तेहरान की तरफ से भी उन देशों को उचित और कड़ा जवाब दिया जाएगा। अरागची ने जोर देकर कहा कि अमेरिका के कदम पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहे हैं और इसके परिणाम सभी देशों के लिए घातक हो सकते हैं। ईरान ने पड़ोसी देशों से इस संघर्ष में तटस्थ रहने की अपील की है।

कुवैत में ड्रोन हमले और मलबे से नुकसान

ईरान की तरफ से ये चेतावनियां कुवैत की सेना की उस रिपोर्ट के आने के कुछ ही घंटों बाद जारी की गईं, जिसमें एक गंभीर घटना का जिक्र किया गया था। कुवैती सेना की रिपोर्ट में कहा गया था कि उसने ईरान द्वारा कई महत्वपूर्ण और रणनीतिक ठिकानों की ओर भेजे गए दुश्मन के ड्रोन्स को बीच में ही रोककर नष्ट कर दिया है। इन ड्रोन्स के मलबे गिरने से उत्तरी कुवैत में स्थित एक सरकारी इमारत को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही, बुबियन द्वीप पर आम नागरिकों की निजी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि फिलहाल इस घटना में किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

सुरक्षा संस्थाओं की चेतावनी

कूटनीतिक प्रयासों के अलावा, ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था से जुड़े एक मीडिया संस्थान ने भी इस मामले में चेतावनी जारी की है। यह दर्शाता है कि ईरान के भीतर सुरक्षा और सैन्य प्रतिष्ठान इस स्थिति को लेकर पूरी तरह से एकजुट हैं। मीडिया संस्थान ने कहा कि ईरान किसी भी बाहरी खतरे का सामना करने के लिए तैयार है और अमेरिकी धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। जैसे-जैसे स्थिति बदल रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच यह तनाव किसी बड़े युद्ध का रूप ले लेगा या कूटनीति के जरिए इसे शांत किया जा सकेगा।