भारतीय क्रिकेट टीम में इस समय सलामी बल्लेबाज की भूमिका के लिए जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है और विशेष रूप से टी20 वर्ल्ड कप 2026 के रोडमैप को देखते हुए चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की नजरें युवा प्रतिभाओं पर टिकी हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टी20 सीरीज इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और इस सीरीज में ईशान किशन की वापसी और संजू सैमसन के प्रदर्शन पर सभी की निगाहें जमी हुई हैं। संजू सैमसन को हाल के दिनों में ओपनिंग में कई मौके मिले हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी देखी गई है। ऐसे में ईशान किशन की दावेदारी एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है।
रनों की रेस में ईशान किशन का दबदबा
जब हम ईशान किशन और संजू सैमसन के टी20 इंटरनेशनल करियर की तुलना। करते हैं, तो 35 मैचों का पड़ाव एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। ईशान किशन ने अब तक अपने करियर में कुल 35 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं और इन 35 मैचों की 35 पारियों में बल्लेबाजी करते हुए ईशान ने 26. 70 के औसत से 908 रन बनाए हैं। दूसरी ओर, संजू सैमसन अब तक 55 मैच खेल चुके हैं, लेकिन अगर हम उनके भी शुरुआती 35 मैचों के रिकॉर्ड को देखें, तो वह ईशान से थोड़े पीछे नजर आते हैं। संजू ने अपने पहले 35 मैचों की 31 पारियों में 25. 03 के औसत से केवल 701 रन बनाए थे। यानी रनों के कुल योग के मामले में ईशान किशन, संजू सैमसन से काफी आगे रहे हैं।
शतक और अर्धशतक: प्रभाव किसका ज्यादा?
टी20 क्रिकेट में केवल रन मायने नहीं रखते, बल्कि यह भी देखा जाता है कि खिलाड़ी ने कितनी बड़ी पारियां खेली हैं और ईशान किशन को उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने 35 मैचों के सफर में 7 अर्धशतकीय पारियां खेली हैं। हालांकि, वह अब तक इस फॉर्मेट में शतक लगाने में सफल नहीं हो सके हैं। इसके विपरीत, संजू सैमसन का रिकॉर्ड थोड़ा अलग है और संजू ने अपने शुरुआती 35 मैचों में भले ही रन कम बनाए हों, लेकिन उनके नाम 2 शानदार शतक और 2 अर्धशतक दर्ज थे। यह आंकड़े बताते हैं कि संजू जब चलते हैं, तो वह लंबी और मैच जिताऊ पारी। खेलने की क्षमता रखते हैं, जबकि ईशान किशन टीम को लगातार अच्छी शुरुआत देने में माहिर हैं।
स्ट्राइक रेट और आक्रामकता का पैमाना
आधुनिक टी20 क्रिकेट में स्ट्राइक रेट सबसे महत्वपूर्ण पैमाना बन गया है और इस मामले में संजू सैमसन, ईशान किशन पर भारी पड़ते नजर आते हैं। ईशान किशन का 35 मैचों के बाद स्ट्राइक रेट 131. 59 का रहा है, जो एक सलामी बल्लेबाज के तौर पर औसत माना जा सकता है। वहीं, संजू सैमसन ने इसी पड़ाव पर 151. 07 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की थी। संजू की यह आक्रामकता उन्हें ईशान से अलग बनाती है और संजू कम गेंदों में मैच का पासा पलटने की काबिलियत रखते हैं, जो टी20 फॉर्मेट की सबसे बड़ी मांग है।
चौके और छक्कों की जंग
बाउंड्री लगाने की क्षमता भी दोनों खिलाड़ियों के बीच तुलना का एक बड़ा आधार है। ईशान किशन ने अपने 35 मैचों के करियर में अब तक 42 छक्के और 95 चौके जड़े हैं। ईशान की बल्लेबाजी में गैप ढूंढने और पावरप्ले का फायदा उठाने की कला साफ दिखती है। वहीं, संजू सैमसन ने अपने 35 मैचों के दौरान 60 चौके और 37 छक्के लगाए थे। छक्कों के मामले में ईशान आगे हैं, लेकिन संजू की टाइमिंग और बड़े शॉट खेलने की शैली उन्हें एक खतरनाक बल्लेबाज बनाती है।
सर्वश्रेष्ठ स्कोर और भविष्य की राह
अगर व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर की बात करें, तो यहां भी संजू सैमसन बाजी मारते दिखते हैं। ईशान किशन का टी20 इंटरनेशनल में सर्वोच्च स्कोर 89 रन रहा है। वहीं, संजू सैमसन ने अपने शुरुआती 35 मैचों के दौरान ही 111 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर अपनी क्लास दिखाई थी। वर्तमान में न्यूजीलैंड सीरीज के दौरान संजू सैमसन के पास खुद को साबित करने का दबाव है। यदि वह ओपनिंग स्लॉट में विफल रहते हैं, तो ईशान किशन की वापसी के रास्ते पूरी तरह खुल जाएंगे। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम इंडिया एक ऐसे ओपनर की तलाश में। है जो न केवल रन बनाए, बल्कि पावरप्ले में विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा सके। अब देखना यह होगा कि चयनकर्ता निरंतरता (ईशान) को चुनते हैं या फिर इम्पैक्ट (संजू) को प्राथमिकता देते हैं।
