भारतीय एलपीजी वाहक जहाज 'नंदा देवी' गुजरात में दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के वाडिनार टर्मिनल के पास समुद्र के बीच (मिड-सी) पहुंच गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह जहाज 47000 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर आया है। देश के विभिन्न हिस्सों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस खेप का आगमन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है और वर्तमान में, नंदा देवी जहाज वाडिनार टर्मिनल के पास स्थिर है, जहां से कार्गो के हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मिड-सी कार्गो ट्रांसफर और वितरण की योजना
अधिकारियों के अनुसार, नंदा देवी से लाई गई 47000 टन एलपीजी को सीधे समुद्र के बीच में ही दूसरे जहाज में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस शिप-टू-शिप ट्रांसफर प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, गैस के स्टॉक को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया जाएगा। रसद योजना के मुताबिक, कुल स्टॉक का आधा हिस्सा तमिलनाडु के एन्नोर पोर्ट पर उतारा जाएगा, जबकि शेष आधा हिस्सा पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट पर भेजा जाएगा। यह वितरण रणनीति दक्षिण और पूर्वी भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार की गई है।
मुंद्रा पोर्ट पर जहाज शिवालिक का परिचालन
एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक अन्य जहाज 'शिवालिक' भी सक्रिय है। वर्तमान में शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पर खड़ा है, जहां वह 12000 टन एलपीजी का स्टॉक अनलोड कर रहा है। मुंद्रा में अपना निर्धारित कार्य पूरा करने के बाद, यह जहाज वाडिनार मिड-सी की ओर प्रस्थान करेगा और शाम तक, शिवालिक जहाज समुद्र के बीच में अन्य जहाजों के साथ कार्गो ट्रांसफर की प्रक्रिया में शामिल होगा, जिससे ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
दहेज और मैंगलोर टर्मिनल्स तक आपूर्ति का विस्तार
शिवालिक जहाज द्वारा प्रबंधित शेष स्टॉक को गुजरात के दहेज पोर्ट और कर्नाटक के मैंगलोर में स्थित दो अलग-अलग टर्मिनल्स पर उतारा जाएगा। परिचालन रोडमैप के अनुसार, इस बहु-पोर्ट अनलोडिंग रणनीति का उद्देश्य पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी तटों पर आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखना है। विभिन्न टर्मिनल्स का उपयोग करने से एलपीजी को बॉटलिंग प्लांटों तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी, जिससे अंततः उपभोक्ताओं तक गैस की पहुंच आसान होगी।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और रसद प्रबंधन की भूमिका
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी वाडिनार टर्मिनल पर इन महत्वपूर्ण मिड-सी ऑपरेशंस की निगरानी कर रही है। टर्मिनल की अवसंरचना बड़े एलपीजी वाहकों को मुख्य डॉक पर बर्थिंग की प्रतीक्षा किए बिना कार्गो प्रबंधित करने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे समय की बचत होती है और अधिकारियों का कहना है कि नंदा देवी और शिवालिक जहाजों के बीच समन्वय और विभिन्न बंदरगाहों तक स्टॉक पहुंचाना एक व्यापक रसद अभ्यास है। यह प्रक्रिया राष्ट्रीय ईंधन ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और विभिन्न राज्यों में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
