शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान देश की चुनावी प्रक्रिया और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने विशेष रूप से मतदान की तारीख और परिणामों की घोषणा के बीच के लंबे अंतराल को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। चतुर्वेदी के अनुसार, चुनावी चरणों के बीच अत्यधिक समय का होना प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर कई चुनौतियां पैदा करता है।
मतदान और परिणामों के बीच लंबी अवधि पर आपत्ति
प्रियंका चतुर्वेदी ने केरल के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वहां 9 अप्रैल को मतदान होना निर्धारित है, जबकि चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। उन्होंने इस लगभग एक महीने के अंतराल को अनुचित बताते हुए कहा कि इतनी लंबी अवधि चुनावी प्रक्रिया की योजना में कमी को दर्शाती है। उनके अनुसार, जब मतदान संपन्न हो जाता है, तो परिणामों के लिए इतना लंबा इंतजार करना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की गतिशीलता को प्रभावित करता है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग को इस अंतराल को कम करने के लिए बेहतर योजना बनानी चाहिए।
'वन नेशन वन इलेक्शन' और चुनावी प्रबंधन
सांसद ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की अवधारणा पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने तर्क दिया कि एक तरफ देश में एक साथ चुनाव कराने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मौजूदा व्यवस्था में एक छोटे राज्य के चुनाव संपन्न कराने में महीनों का समय लग रहा है। चतुर्वेदी ने कहा कि लंबी चुनावी प्रक्रिया के कारण सरकार गठन और नीतिगत निर्णयों में अनावश्यक देरी होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि चुनाव आयोग अपनी प्रबंधन क्षमता में सुधार करे, तो कई चरणों में होने वाले चुनावों को अधिक कुशलता से कम समय में पूरा किया जा सकता है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक जिम्मेदारी
प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी देश में पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है और उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी नागरिक को उसके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए। उन्होंने आयोग से अपील की कि वह अपनी स्वायत्तता को बनाए रखे और सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर (Level Playing Field) सुनिश्चित करे और उनके अनुसार, मतदाताओं का संस्थाओं पर भरोसा तभी बना रहेगा जब प्रक्रिया पारदर्शी होगी।
पश्चिम बंगाल के लिए विशेष आदेशों पर विवाद
पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले चुनावों का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने पश्चिम बंगाल के संदर्भ में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष आदेश सिर्फ पश्चिम बंगाल के लिए जारी किए जा रहे हैं, जो किसी खास राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने के प्रयास जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने दावा किया कि आयोग के कुछ कदम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे के अनुरूप दिखाई देते हैं। हालांकि, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन चुनौतियों के बावजूद पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में वापसी करेगी।
चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार की आवश्यकता
सांसद ने अंत में कहा कि चुनावी सुधारों का उद्देश्य केवल मतदान की तकनीक तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें समयबद्धता और प्रशासनिक निष्पक्षता भी शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और जनता के मन में उठ रहे सवालों का समाधान करना चुनाव आयोग का कर्तव्य है। चतुर्वेदी के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का संदेह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकता है, इसलिए आयोग को अपनी कार्यप्रणाली में अधिक स्पष्टता और तेजी लानी चाहिए।
