लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संस्थापक कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। राहुल गांधी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने कांशीराम के सामाजिक और राजनीतिक योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान देने का आग्रह किया है। राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार कांशीराम के समर्थन में बयान दे रहे हैं और उन्हें दलितों और पिछड़ों की आवाज उठाने वाला एक महत्वपूर्ण नेता बता रहे हैं।
कांशीराम के लिए भारत रत्न की औपचारिक मांग
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कांशीराम के जीवन संघर्ष और उनके द्वारा समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख किया है। कांग्रेस पार्टी के अनुसार कांशीराम ने भारतीय राजनीति में एक बड़े वर्ग को पहचान दिलाई और उन्हें सत्ता में भागीदारी के लिए प्रेरित किया। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी ने इस संबंध में एक प्रस्ताव भी पारित किया था। राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम का योगदान केवल एक पार्टी तक सीमित नहीं है बल्कि उन्होंने पूरे देश के सामाजिक ढांचे को प्रभावित किया है। पार्टी का मानना है कि उन्हें भारत रत्न देना उन लाखों लोगों का सम्मान होगा जिनके अधिकारों के लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया।
नेहरू और कांशीराम के संदर्भ में राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने हाल ही में लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित संविधान सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया कि यदि भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू कुछ और वर्षों तक जीवित रहे होते तो कांशीराम कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। राहुल गांधी ने कहा कि कांशीराम के विचार और कांग्रेस की विचारधारा में समानता थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि कांग्रेस ने उस समय अपना काम पूरी तरह से और सही तरीके से किया होता तो शायद कांशीराम को अलग राजनीतिक दल बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। नेहरू का निधन 1964 में हुआ था जबकि कांशीराम ने 1978 में बामसेफ और 1984 में बसपा का गठन किया था।
कांग्रेस की ऐतिहासिक भूमिका और आत्म-मंथन
संविधान सम्मेलन में बोलते हुए राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के अतीत पर आत्म-मंथन किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम इसलिए सफल हुए क्योंकि कांग्रेस समाज के सभी वर्गों को समान रूप से साथ लेकर चलने में कहीं न कहीं पीछे रह गई थी। राहुल ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांशीराम जी समाज में बराबरी की बात करते थे और कांग्रेस उस समय अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी थी। उन्होंने कांशीराम की सफलता को कांग्रेस की तत्कालीन कमियों से जोड़कर देखा। राहुल गांधी के अनुसार कांशीराम ने उन लोगों को संगठित किया जिन्हें मुख्यधारा की राजनीति में पर्याप्त स्थान नहीं मिल रहा था। यह बयान राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर एक नई दृष्टि प्रस्तुत करता है।
85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी का आरोप
राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान प्रशासन देश की 85 प्रतिशत आबादी की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार यह देश सभी का है और सभी को समान अधिकार प्राप्त हैं लेकिन वर्तमान में समाज को 15 और 85 प्रतिशत के दो हिस्सों में बांट दिया गया है। राहुल गांधी के अनुसार देश के संसाधनों और सत्ता का लाभ केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है जबकि दलित पिछड़े और अल्पसंख्यक जो कि आबादी का 85 प्रतिशत हिस्सा हैं उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने जाति जनगणना की मांग को भी इसी संदर्भ में जोड़ा और कहा कि जब तक संख्या और भागीदारी का सही पता नहीं चलेगा तब तक न्याय संभव नहीं है।
वैचारिक तुलना और राजनीतिक रणनीति
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और कांशीराम की तुलना सावरकर से की और उन्होंने कहा कि गांधी जी आंबेडकर और कांशीराम ने अपने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि महात्मा गांधी कई वर्षों तक जेल में रहे लेकिन उन्होंने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया। इसी तरह कांशीराम ने भी अपने जीवन में कभी समझौता नहीं किया क्योंकि उनके लिए उनके आदर्श सर्वोपरि थे। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने राहुल गांधी के इन बयानों पर पलटवार किया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांशीराम ने कांग्रेस के विरोध में ही अपनी राजनीति शुरू की थी और कांग्रेस ने हमेशा उनका अपमान किया और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह रुख 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में दलित मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
