कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दोहरी नागरिकता मामले में फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के अपने ही पिछले आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह स्वीकार किया कि राहुल गांधी को बिना किसी पूर्व नोटिस के एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना कानूनी रूप से उचित नहीं था। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 20 अप्रैल की तारीख तय की है।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने क्यों बदला अपना फैसला?
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने शनिवार को आदेश टाइप होने से पहले अपने फैसले की पुनः समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पाया कि साल 2014 में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक निर्णय के अनुसार, एफआईआर दर्ज करने की मांग वाले प्रार्थना पत्रों के खारिज होने की स्थिति में केवल पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) ही पोषणीय होती है। ऐसे मामलों में प्रस्तावित आरोपी को नोटिस भेजना अनिवार्य है और इसी कानूनी आधार को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना फैसला करना उचित नहीं है, जिसके बाद अपने ही आदेश पर रोक लगा दी गई।
याचिकाकर्ता के आरोप और कानूनी मांगें
कर्नाटक के निवासी एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।
इससे पहले, शुक्रवार को जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया था।
रायबरेली से लखनऊ तक मामले का घटनाक्रम
यह कानूनी विवाद शुरू में रायबरेली की विशेष MP/MLA कोर्ट में दायर किया गया था। याचिकाकर्ता के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर, 2025 को इस मामले को लखनऊ स्थानांतरित कर दिया था। इसके बाद, लखनऊ की MP/MLA कोर्ट ने 28 जनवरी, 2026 को इस याचिका को खारिज कर दिया था। निचली अदालत से राहत न मिलने पर याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने पहले एफआईआर का आदेश दिया, लेकिन 18 अप्रैल, 2026 को अपने फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया कि बिना नोटिस दिए एफआईआर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती।
याचिकाकर्ता की अगली रणनीति और CJI से शिकायत
कोर्ट द्वारा एफआईआर के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का फैसला वापस लेने के विरुद्ध वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से शिकायत करेंगे। विग्नेश शिशिर ने मामले की विस्तृत जांच की मांग दोहराई है, जिसे पूर्व में निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। अब सभी की नजरें 20 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
