आईटी सेक्टर में काम करने वाले पेशेवरों के लिए यह साल किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हो रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शुमार मेटा (जिसे पहले फेसबुक के नाम से जाना जाता था) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना लिया है। आने वाले कुछ ही महीनों में कंपनी करीब 16,000 लोगों की छंटनी करने जा रही है। यह सिर्फ एक कंपनी का हाल नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री इस वक्त एक बड़े बदलाव और छंटनी के भारी दौर से गुजर रही है।
मेटा में छंटनी का बड़ा दौर और AI का प्रभाव
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा अपनी अब तक की सबसे बड़ी रिस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है और इसका पहला चरण 20 मई से शुरू होने की आशंका है, जिसमें सीधे तौर पर 8,000 कर्मचारियों पर गाज गिरेगी। पिछले साल 31 दिसंबर की फाइलिंग के अनुसार, कंपनी में करीब 79,000 लोग काम कर रहे थे। अब सवाल उठता है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में नौकरियां क्यों जा रही हैं और इसका सीधा जवाब है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। कंपनी के मुखिया मार्क जुकरबर्ग एआई, जनरेटिव टूल्स और मशीन लर्निंग के बुनियादी ढांचे पर भारी जोर दे रहे हैं। कंपनी अपने कामकाज को तेजी से ऑटोमेटेड यानी सॉफ्टवेयर के हवाले करना चाहती है, जिसके कारण इंसानी वर्कफोर्स की जरूरत घट रही है। रिपोर्ट बताती है कि साल के दूसरे हिस्से में भी छंटनी का यह सिलसिला जारी रहेगा।
डिज्नी और मार्वल स्टूडियोज पर भी मंडराया संकट
नौकरियों का यह संकट सिर्फ सोशल मीडिया दिग्गजों तक सीमित नहीं है। मनोरंजन जगत की बड़ी कंपनी डिज्नी ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी का ऐलान कर दिया है और डिज्नी के सीईओ जोश डी’अमारो ने खुद इस बात की घोषणा की है कि कंपनी अलग-अलग डिवीजनों से करीब 1,000 कर्मचारियों को बाहर निकाल रही है। इसे डिज्नी के इतिहास में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंतरिक बदलाव माना जा रहा है और इस छंटनी की सबसे ज्यादा मार ‘मार्वल स्टूडियोज’ पर पड़ी है, जहां के लगभग 8 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है।
ओरेकल के कड़े नियम और सेवरेंस पैकेज की शर्त
इधर, जानी-मानी अमेरिकी आईटी कंपनी ओरेकल का रवैया नौकरी गंवाने वाले कर्मचारियों की परेशानी को और बढ़ा रहा है। ओरेकल ने दुनिया भर में अपने 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की है, जिसमें भारत के करीब 12,000 कर्मचारी भी शामिल हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ओरेकल की वह शर्त है जो उसने निकाले गए कर्मचारियों के सामने रखी है। कंपनी ने साफ कर दिया है कि जब तक कर्मचारी ‘डॉक्यूसाइन’ (DocuSign) के जरिए भेजे गए कागजातों पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, उन्हें कोई सेवरेंस पैकेज (मुआवजा) नहीं दिया जाएगा। यानी, हस्ताक्षर नहीं, तो पैसा नहीं। कंपनी ने अभी तक इस पूरे मामले या अपनी इन कड़ी शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
