PM मोदी का आज रात राष्ट्र के नाम संबोधन: महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष को घेर सकते हैं प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि वह लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक के गिरने और विपक्ष द्वारा सहयोग न किए जाने के मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं। भाजपा ने इसे 'काला दिन' करार दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शनिवार रात एक बार फिर राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे। उनका यह संबोधन रात 8:30 बजे निर्धारित है। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि पीएम मोदी महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर देश को संबोधित कर सकते हैं और इस दौरान वह विपक्ष की ओर से सहयोग नहीं किए जाने को लेकर उन पर निशाना साध सकते हैं।

लोकसभा में विधेयक गिरने के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

इससे पहले, दो दिनों तक चली लंबी बहस के बाद विपक्ष की ओर से विरोध में वोट डालने के कारण शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो पाया था। महिला आरक्षण को साल 2029 से लागू कराने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े इस विधेयक पर वोटिंग के दौरान इसे खारिज कर दिया गया। इसके अगले दिन यानी आज शनिवार को पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बयानबाजी का दौर जारी रहा। विपक्ष ने इसे केंद्र सरकार की साजिश करार दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है।

भाजपा का विपक्ष पर तीखा हमला: 'महिलाओं के साथ विश्वासघात'

भारतीय जनता पार्टी ने विधेयक के खारिज होने को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक 'काला दिन' बताया है। पार्टी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर देश की महिलाओं के साथ 'विश्वासघात' करने का गंभीर आरोप लगाया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने इस मुद्दे पर कहा कि कांग्रेस और विपक्ष को पूरे देश की महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने अपनी विश्वसनीयता हमेशा के लिए खो दी है। उन्होंने इसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर एक 'काला दाग' बताया जिसे कभी मिटाया नहीं जा सकेगा। रिजीजू ने सवाल उठाया कि यह विधेयक महिलाओं को ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व देने के बारे में था, तो इसमें किसी को आपत्ति कैसे हो सकती थी।

क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और दक्षिण भारत का मुद्दा

केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष के इस कदम ने महिला सशक्तिकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को कमजोर किया है। उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण भारत का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष ने अपने फैसले से दक्षिण भारत को नुकसान पहुंचाया है, जहां सीटों में 50 फीसदी से अधिक की वृद्धि हो रही थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिलने वाले इस सुनहरे अवसर से उन्हें वंचित कर दिया गया और यह सब राहुल गांधी की अगुवाई में हुआ है। वहीं, बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने भी कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर महिलाओं को धोखा देने और अपने पिछले रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया।

विपक्ष का तर्क: संघीय ढांचे को बचाने की जीत

दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रही है और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र पर हमला करते हुए कहा कि यह विधेयक संघीय ढांचे को बदलने का एक षड्यंत्र था और इसका गिरना संविधान तथा विपक्षी एकजुटता की ऐतिहासिक जीत है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर तत्काल प्रभाव से लागू कर सकती है, जिसका पूरा विपक्ष समर्थन करेगा।

परिसीमन और विधायी प्रक्रिया पर सवाल

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने पर उन्हें कड़ी आपत्ति है और उन्होंने कहा कि यदि इसे परिसीमन से न जोड़ा जाता, तो विधेयक शुक्रवार को ही पारित हो जाता। समाजवादी पार्टी के नेता राम गोपाल यादव ने विधायी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यह विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका था, तो इसमें नए संशोधन लाने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना दो-तिहाई बहुमत के इसे लाने का मतलब केवल राजनीतिक मकसद साधना था।