केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्षी इंडी (INDIA) गठबंधन 'किंतु-परंतु' और 'अगर-मगर' का सहारा लेकर महिला आरक्षण का विरोध कर रहा है। गृह मंत्री महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर सदन में हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में होने वाली बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं।
महिला आरक्षण और 2029 के चुनाव पर स्पष्टीकरण
अमित शाह ने सदन को सूचित किया कि इस महत्वपूर्ण बहस में कुल 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हालांकि किसी ने सीधे तौर पर महिला आरक्षण विधेयक का विरोध नहीं किया, लेकिन इंडिया गठबंधन का विरोध इसके क्रियान्वयन को लेकर है और शाह ने घोषणा की कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के आधार पर ही लड़ा जाएगा। उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे बिल पास कराते हैं, तो सरकार हर राज्य में सीटों को 50 फीसदी तक बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष वोट नहीं देता है और बिल गिर जाता है, तो देश की मातृशक्ति इसका हिसाब मांगेगी।
परिसीमन और 'एक व्यक्ति, एक वोट' का सिद्धांत
गृह मंत्री ने परिसीमन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में देश में प्रतिनिधित्व की भारी असमानता है।
उन्होंने कहा कि 'एक व्यक्ति - एक वोट - एक मूल्य' का सिद्धांत हमारे संविधान की मूल भावना है और परिसीमन इसे सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने 50 साल तक देश को उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रखा।
कांग्रेस पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप
अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का सबसे बड़ा विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 1951 और 1971 में जाति जनगणना का विरोध किया था और अब चुनाव हारने के बाद वे ओबीसी हितैषी होने का ढोंग कर रहे हैं। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने आज तक एक भी ओबीसी प्रधानमंत्री नहीं दिया, जबकि भाजपा ने अति पिछड़ा वर्ग से प्रधानमंत्री दिया है। उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि वर्तमान सरकार में 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रिमंडल का 40 फीसदी है। इसके अलावा, मोदी सरकार ने ही ओबीसी कमीशन को संवैधानिक मान्यता दी और सूचियों को संशोधित करने का अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाया।
धर्म आधारित आरक्षण और 2026 की जनगणना
आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता है। उन्होंने कहा कि आरक्षण जन्म से मिलता है और इसे किसी अन्य तरीके से प्राप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने इंडी गठबंधन पर तुष्टिकरण की नीति के तहत मुस्लिम आरक्षण की बात करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा न तो धर्म के आधार पर आरक्षण देगी और न ही किसी को देने देगी। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी घोषणा की कि नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने 2026 की जनगणना को जाति के साथ कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने उन भ्रांतियों को खारिज किया कि यह बिल जाति जनगणना को टालने के लिए लाया गया है।
दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व का संरक्षण
उत्तर बनाम दक्षिण के नैरेटिव पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों का इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर भारत का।
उन्होंने अंत में कहा कि परिसीमन का उद्देश्य महिलाओं को मजबूत बनाना और संविधान की भावना के अनुरूप समय पर आरक्षण लागू करना है ताकि 2029 के चुनाव महिला आरक्षण के साथ संपन्न हो सकें।
