लोकसभा में पेश हुआ 850 सीटों वाला बिल, चर्चा के पक्ष में पड़े 251 वोट; जानें विपक्ष को कितने मिले मत

संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए। इनका लक्ष्य 2029 तक आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है। सपा और कांग्रेस के कड़े विरोध के बीच सदन में तीखी बहस और वोटिंग हुई।

संसद में महिला आरक्षण संशोधन बिल पेश

संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए और इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को प्रभावी ढंग से लागू करना है। इसके साथ ही, इन बिलों में लोकसभा में सांसदों की कुल संख्या को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है। जैसे ही ये बिल सदन के पटल पर रखे गए, लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा जमकर हंगामा किया गया और विशेष रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) ने इन प्रस्तावों का कड़ा विरोध किया। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सपा सांसद अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों का बिंदुवार जवाब दिया।

सदन की कार्यवाही और वोटिंग के आंकड़े

सदन में बिलों को पेश किए जाने के बाद सरकार की ओर से इन्हें ध्वनि मत से पास कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर असहमति जताते हुए औपचारिक वोटिंग की मांग की। विपक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए स्पीकर ने बिल पर चर्चा और वोटिंग की अनुमति प्रदान की। वोटिंग के दौरान सरकार के पक्ष में 251 सांसदों ने मतदान किया, जबकि विपक्ष के पाले में 185 वोट पड़े।

चर्चा का समय और आगामी कार्यक्रम

इन बिलों पर विस्तृत चर्चा के लिए संसद में समय निर्धारित कर दिया गया है।

विपक्ष के आरोप और परिसीमन पर विवाद

विपक्षी दलों ने विशेष रूप से परिसीमन बिल का विरोध किया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए संविधान को 'हाईजैक' करना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने आरक्षण के भीतर मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित करने की मांग उठाई।

अमित शाह का सपा को करारा जवाब

अखिलेश यादव की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देना असंवैधानिक है और उन्होंने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है, तो वह अपनी पार्टी के सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इस पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।