संसद में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास नहीं हो पाने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए इसे देश की महिलाओं के साथ 'धोखा' करार दिया है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का इस विफलता पर जश्न मनाना महिलाओं के अधिकारों का अपमान है और उन्हें 2029 के चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात का आरोप
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट साझा करते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। ' शाह ने आगे कहा कि विपक्ष का यह जश्न हर उस महिला का अपमान है, जो दशकों से अपने संवैधानिक अधिकार का इंतजार कर रही है। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधते हुए पूछा कि वे कितनी बार महिलाओं के साथ विश्वासघात करेंगे।
विपक्षी दलों की भूमिका पर उठाए सवाल
अमित शाह ने लोकसभा में हुए घटनाक्रम को 'बेहद अजीब दृश्य' बताया। उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस, टीएमसी (TMC), डीएमके (DMK) और समाजवादी पार्टी (SP) का नाम लेते हुए कहा कि इन दलों ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया। शाह के अनुसार, महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस विधेयक को खारिज करना और फिर उस पर जीत के नारे लगाना निंदनीय और अकल्पनीय है। उन्होंने कहा कि अहंकार की यह खुशी असलियत में एक बड़ी पराजय है जिसे विपक्ष समझ नहीं पा रहा है।
वोटिंग के आंकड़े और बिल गिरने का तकनीकी कारण
शुक्रवार, 17 अप्रैल को लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन बिल पेश किया गया था, जिसे सरकार पास कराने में विफल रही।
2029 के चुनावों के लिए शाह की चेतावनी
अमित शाह ने कहा कि अब देश की महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में वह 33% आरक्षण नहीं मिल पाएगा, जो उनका अधिकार था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों की मानसिकता न तो महिलाओं के हित में है और न ही देश के हित में। ' उन्होंने कहा कि विपक्ष को न केवल 2029 के लोकसभा चुनावों में, बल्कि हर स्तर पर और हर चुनाव में 'महिलाओं के प्रकोप' का सामना करना पड़ेगा।
