भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद सोमवार, 16 मार्च को सकारात्मक रुख देखा गया। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, ऑटो और एफएमसीजी क्षेत्रों में हुई खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों ने अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश की। सत्र के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण बढ़त के साथ बंद हुए और 85 के स्तर पर बंद हुआ। 80 के स्तर पर स्थिर हुआ।
प्रमुख सूचकांकों का प्रदर्शन और बाजार का उतार-चढ़ाव
सोमवार के कारोबारी सत्र में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। 76 से लगभग 1,553 अंक ऊपर उछला। 25 से लगभग 450 अंकों या 2% की रिकवरी दर्ज की। बाजार के जानकारों के अनुसार, यह तेजी मुख्य रूप से बड़े शेयरों (ब्लू-चिप स्टॉक्स) में आई खरीदारी की वजह से थी। हालांकि, बेंचमार्क सूचकांकों में तेजी के बावजूद व्यापक बाजार में दबाव बना रहा। 47% की कमी देखी गई। 92 करोड़ ही बढ़ सका।
बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में खरीदारी का असर
बाजार की इस रिकवरी में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों ने नेतृत्व किया। 50% का उछाल आया। 24% की तेजी देखी गई। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एसबीआई जैसे दिग्गज शेयरों में निवेशकों ने रुचि दिखाई। विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया गिरावट के बाद इन शेयरों के मूल्यांकन में सुधार हुआ था, जिससे खरीदारी के अवसर बने। 14% की मजबूती के साथ बंद हुए, जिसने बाजार को निचले स्तरों से उबारने में मदद की।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की स्थिति
बाजार में आई इस तेजी के बीच वैश्विक चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं और विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में होने वाले घटनाक्रमों पर बाजार की पैनी नजर है। सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा बाजार के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
मुद्रा बाजार और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक
घरेलू शेयर बाजार में सुधार के बावजूद भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। 42 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपए पर दबाव डाला है। इसके साथ ही, निवेशकों की नजरें 18 मार्च को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत बैठक पर टिकी हैं। हालांकि उम्मीद की जा रही है कि ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी, लेकिन फेडरल रिजर्व की भविष्य की टिप्पणियां और महंगाई पर उनका रुख वैश्विक बाजारों की दिशा तय करेगा।
