भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 1000 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे आ गया। यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देखने को मिली है। 50 लाख करोड़ से अधिक की कमी आई है।
बाजार की वर्तमान स्थिति और प्रमुख गिरावट
बुधवार को बाजार की शुरुआत सपाट हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे कारोबारी सत्र आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव तेज होता गया। 73 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। 65 के स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स पर एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, HDFC बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयरों में 2% से 4% तक की गिरावट देखी गई। हालांकि, अडानी पोर्ट्स, NTPC, सन फार्मा और टेक महिंद्रा जैसे शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
मध्य पूर्व में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
बाजार में आई इस गिरावट का एक प्रमुख कारण मध्य पूर्व में जारी युद्ध और तनाव है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए थे कि युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। ईरान की सरकार ने चेतावनी दी है कि उसके सुरक्षा बल किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और बुधवार सुबह ईरान द्वारा इजराइल और लेबनान के कई इलाकों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति रोकने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट का प्रभाव
शेयर बाजार पर भारतीय रुपये की कमजोरी का भी गहरा असर पड़ा है। 8050 था। 35 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था। मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर इंडेक्स की मजबूती रुपये पर दबाव बना रही है। रुपये की इस कमजोरी ने विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालने के लिए प्रेरित किया है, जिसका सीधा असर इक्विटी मार्केट पर दिखाई दे रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार में लगातार की जा रही बिकवाली ने बाजार के सेंटिमेंट को कमजोर किया है। 64 करोड़ मूल्य के भारतीय शेयर बेचे। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले सप्ताह में ही FPIs ने ₹21,800 करोड़ से अधिक की निकासी की है। फरवरी में शुद्ध खरीदार रहने के बाद विदेशी निवेशकों का यह रुख बाजार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण निवेशक उभरते बाजारों से अपना निवेश सुरक्षित ठिकानों की ओर ले जा रहे हैं।
मुनाफावसूली और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता
मंगलवार को बाजार में आई तेजी के बाद बुधवार को निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। मंगलवार को सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक चढ़ा था, लेकिन यह बढ़त स्थायी साबित नहीं हुई। कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। 98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। हालांकि तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक मानी जाती है, लेकिन इसके पीछे के कारण, जैसे वैश्विक मांग में कमी और युद्ध की आशंका, बाजार को अस्थिर कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,150 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट था, जिसके टूटने के बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ गया है।
