शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1017 अंक लुढ़का, निफ्टी 24500 के नीचे

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखी गई, जिससे बीएसई सेंसेक्स 1017.37 अंक गिरकर 78,998.53 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी भी 315.45 अंक टूटकर 24,450.45 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मुख्य कारण रहे।

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को एक बार फिर भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। 53 के स्तर पर बंद हुआ। 45 के महत्वपूर्ण स्तर पर आ गया। बाजार में इस गिरावट के कारण अधिकांश क्षेत्रों के शेयरों में लाल निशान में कारोबार हुआ, जिससे बाजार पूंजीकरण में लाखों करोड़ों रुपये की कमी आई।

बाजार में यह गिरावट एक दिन की मामूली राहत के बाद आई है। गुरुवार को बाजार में कुछ सुधार देखा गया था, लेकिन शुक्रवार को वैश्विक संकेतों और घरेलू बिकवाली के दबाव ने धारणा को कमजोर कर दिया। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 78,800 के निचले स्तर को भी छुआ था। निवेशकों के बीच घबराहट का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही निरंतर बिकवाली को माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता

शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का एक प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष की आशंका से निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। तनाव बढ़ने की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का डर बना हुआ है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा बड़े पैमाने पर बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र यानी गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने करीब ₹3,752 crore मूल्य के शेयर बेचे। मार्च महीने के दौरान अब तक एफआईआई द्वारा कुल बिकवाली का आंकड़ा लगभग ₹16,000 crore तक पहुंच गया है। विदेशी पूंजी की इस निरंतर निकासी ने बाजार की तरलता को प्रभावित किया है और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन के बावजूद सूचकांकों को नीचे धकेल दिया है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव डाला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5% की बढ़त के साथ $86 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है, जो पिछले 20-month का उच्चतम स्तर है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से व्यापार घाटा बढ़ने और मुद्रास्फीति में तेजी आने की आशंका रहती है। तेल की बढ़ती कीमतों ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों को प्रभावित किया है जिनकी इनपुट लागत कच्चे तेल पर निर्भर करती है।

वैश्विक बाजारों से प्राप्त कमजोर और नकारात्मक संकेत

भारतीय बाजार पर वैश्विक बाजारों की कमजोरी का भी स्पष्ट असर देखा गया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) इंडेक्स 1% से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले सत्र के दौरान देखी गई गिरावट ने भी भारतीय निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और आर्थिक विकास की धीमी गति को लेकर बनी चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी का पलायन हो रहा है।

बाजार पूंजीकरण में गिरावट और क्षेत्रीय प्रदर्शन का विवरण

शुक्रवार की इस गिरावट के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली देखी गई। हालांकि, इस गिरावट के बीच भी आईटी, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों में मामूली खरीदारी देखी गई, लेकिन यह व्यापक बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी। निफ्टी के 50 शेयरों में से अधिकांश शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जो बाजार में व्याप्त व्यापक बिकवाली के दबाव को दर्शाता है।