केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित संघर्ष की स्थिति को देखते हुए देश में ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सभी तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे रसोई गैस (एलपीजी) के उत्पादन को अपनी अधिकतम क्षमता तक बढ़ाएं और इस आदेश का मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी भी संभावित अस्थिरता के दौरान भारतीय घरों में खाना पकाने की गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
घरेलू आपूर्ति और सरकारी तेल कंपनियों को प्राथमिकता
सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, रिफाइनरियों को न केवल उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा गया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उत्पादित एलपीजी की बिक्री केवल सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ही की जाए। इन कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि वितरण नेटवर्क पर सरकारी नियंत्रण बना रहे और किसी भी प्रकार की जमाखोरी या कृत्रिम कमी को रोका जा सके।
ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और रूसी तेल का प्रभाव
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आयात रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया के संकटों का प्रभाव कम हुआ है। 2% थी, जो फरवरी 2024 तक बढ़कर 20% के स्तर पर पहुंच गई है। 4 lakh बैरल कच्चे तेल का आयात कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, रूस से बढ़ते आयात और अन्य वैश्विक स्रोतों से आपूर्ति के कारण भारत अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर कम निर्भर है। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
रिफाइनरियों की परिचालन स्थिति और भ्रामक खबरों का खंडन
सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों पर मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के बंद होने की खबरों को सरकार ने पूरी तरह से निराधार और गलत बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MRPL सहित देश की सभी प्रमुख रिफाइनरियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं और उनके पास परिचालन के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने रिफाइनरियों को यह भी निर्देश दिया है कि एलपीजी बनाने के लिए आवश्यक मुख्य घटकों, जैसे प्रोपेन और ब्यूटेन, का उपयोग पेट्रोकेमिकल निर्माण के लिए न किया जाए। इसके बजाय, इन गैसों का उपयोग पूरी तरह से घरेलू एलपीजी सिलेंडर भरने के लिए किया जाएगा ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहे।
पश्चिम एशिया संकट और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जो दुनिया के कुल तेल व्यापार के एक-तिहाई हिस्से का मार्ग है, वहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वैश्विक कीमतों और आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। भारत सरकार ने इन जोखिमों को भांपते हुए वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और घरेलू उत्पादन पर जोर देना शुरू कर दिया है और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य देशों से भी तेल और गैस के आयात को बढ़ाने के लिए तैयार है, ताकि घरेलू अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय तनाव का न्यूनतम प्रभाव पड़े।
