भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ स्वाहा

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को धराशायी हो गया। बीएसई सेंसेक्स 1470.50 अंक और निफ्टी 488.05 अंक गिरकर बंद हुए, जिससे निवेशकों को लगभग ₹10 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने दबाव बढ़ाया।

सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली का माहौल रहा, जिससे प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला। शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बाजार लाल निशान पर बंद हुआ। इस गिरावट के कारण बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण कुछ ही घंटों में लगभग ₹10 लाख करोड़ कम हो गया।

सूचकांकों में भारी गिरावट और बाजार पूंजीकरण

93% की गिरावट के साथ 74,563 के स्तर पर बंद हुआ। 10 के स्तर पर आ गया। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। सुबह सत्र की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव बना रहा, जो दिन चढ़ने के साथ और गहराता गया। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई, जिससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का प्रभाव

ईरान द्वारा दो तेल टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई बाधित होने की आशंका ने कीमतों को हवा दी है। 5 के आसपास बनी रही। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% से अधिक आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से देश का आयात बिल बढ़ता है और राजकोषीय घाटे पर दबाव पड़ता है, जिससे शेयर बाजार में नकारात्मक प्रतिक्रिया देखी गई।

वैश्विक बाजारों से प्राप्त कमजोर संकेत

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित किया है। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI), जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225), चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई, जहां डॉव जोन्स 700 से अधिक अंक गिरकर इस वर्ष पहली बार 47,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ। एसएंडपी 500 और नैस्डैक कंपोजिट में भी गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय बाजार की ओपनिंग और ट्रेडिंग सेंटीमेंट पर पड़ा।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली

घरेलू शेयर बाजार में गिरावट का एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही भारी बिकवाली है। 87 करोड़ मूल्य के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा कुल बिकवाली का आंकड़ा ₹39,000 करोड़ को पार कर गया है। विदेशी निवेशकों की इस निकासी ने बाजार की तरलता को प्रभावित किया है और घरेलू निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है।

भारतीय रुपये में रिकॉर्ड गिरावट

शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। 37 के स्तर पर बंद हुआ। 37 तक गिर गया। रुपये की कमजोरी से आयात महंगा हो जाता है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा रहता है। मुद्रा बाजार की इस अस्थिरता ने इक्विटी मार्केट में निवेशकों के भरोसे को और कमजोर किया है।