उत्तर प्रदेश के नोएडा में एलपीजी गैस सिलेंडरों की आपूर्ति में आई भारी कमी के कारण आम जनता को भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न गैस गोदामों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग सुबह 3:00 बजे से ही खाली सिलेंडर लेकर गोदामों के बाहर कतारबद्ध हो रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक-एक गोदाम पर 300 से अधिक लोग अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में उपभोक्ताओं की बेबसी और प्रशासन के प्रति नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे पिछले तीन दिनों से लगातार गैस सिलेंडर पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई कामकाजी लोग अपने दफ्तरों से छुट्टी लेकर घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। इसके बावजूद, सिलेंडर मिलने की कोई निश्चित गारंटी नहीं मिल पा रही है। उपभोक्ताओं के अनुसार, गोदामों पर स्टॉक की कमी बताई जा रही है, जिससे उनकी दैनिक रसोई की गतिविधियां पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं।
नोएडा के गैस गोदामों पर उमड़ी भारी भीड़
नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में स्थित गैस वितरण केंद्रों पर सुबह के शुरुआती घंटों से ही अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। लोग अंधेरे में ही गोदामों के बाहर पहुंच रहे हैं ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर मिल सके। कतारों में खड़े लोगों में महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई स्थानों पर कतारें मुख्य सड़कों तक पहुंच गई हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि वितरण केंद्रों पर पारदर्शिता की कमी है और उन्हें यह नहीं बताया जा रहा है कि स्टॉक कब तक सामान्य होगा।
आपूर्ति में बाधा के अंतरराष्ट्रीय कारण
गैस की इस किल्लत के पीछे अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य कारण बताई जा रही हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है और भारत अपनी एलपीजी आवश्यकता का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आयातित गैस का लगभग 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंचता है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में उत्पन्न बाधा ने घरेलू स्तर पर वितरण नेटवर्क को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (विपणन और तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने इस स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में आपूर्ति श्रृंखला चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। सुजाता शर्मा के अनुसार, सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार अन्य ऊर्जा विकल्पों और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी सक्रियता से विचार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचा जा सके।
सरकार द्वारा उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन
ईंधन और गैस की किल्लत को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली इस समिति में विदेश मंत्री एस और जयशंकर और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को शामिल किया गया है। यह समिति देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति की निरंतर निगरानी करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार की बड़ी रुकावट को दूर करने के लिए कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं पर प्रभाव और वर्तमान स्थिति
आपूर्ति में देरी के कारण नोएडा के हजारों परिवारों का बजट और दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है। लोग अब वैकल्पिक ईंधन जैसे इंडक्शन कुकटॉप और बिजली के उपकरणों का सहारा लेने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि स्टॉक की कोई कमी नहीं है और केवल परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाधाओं के कारण वितरण में देरी हो रही है। स्थानीय प्रशासन और गैस एजेंसियां अब प्राथमिकता के आधार पर बुकिंग के अनुसार वितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का प्रयास कर रही हैं ताकि कतारों को कम किया जा सके।
