बिहार, हरियाणा और ओडिशा सहित देश के 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इन चुनावों में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपना वर्चस्व कायम रखा है। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 37 सीटों में से 26 पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे, जबकि शेष 11 सीटों पर सोमवार को मतदान हुआ। बिहार में एनडीए ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी पांच सीटों पर कब्जा जमाया। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि हरियाणा में एक सीट बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के खाते में गई।
बिहार में एनडीए का क्लीन स्वीप और प्रमुख चेहरे
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत हासिल की है। निर्वाचित उम्मीदवारों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन शामिल हैं। इनके अलावा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी अपनी सीटें सुरक्षित की हैं। बीजेपी के शिवेश कुमार पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस चुनाव में विपक्षी गठबंधन को बड़ा झटका लगा है, जहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उन्हें ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायकों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन यह जीत के लिए पर्याप्त नहीं रहा।
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग और बीजेपी की बढ़त
ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए हुए मतदान में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखा गया। यहां बीजेपी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजू जनता दल (बीजेडी) को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग की खबरें सामने आईं। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस के तीन और बीजेडी के दो विधायकों ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया। निर्वाचित सदस्यों में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और बीजेडी के संतृप्त मिश्रा शामिल हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की। पांचवें उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे डॉ. दत्तेश्वर होता को हार का सामना करना पड़ा।
हरियाणा में कांटे की टक्कर और मतगणना विवाद
हरियाणा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुआ चुनाव काफी नाटकीय रहा। मतदान की गोपनीयता के उल्लंघन के आरोपों के कारण मतगणना में कई घंटों की देरी हुई और बीजेपी और कांग्रेस दोनों दलों ने एक-दूसरे पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र लिखकर वैध मतों को अवैध ठहराने की कोशिशों पर आपत्ति जताई थी। देर रात घोषित परिणामों में बीजेपी के संजय भाटिया ने आसान जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्ध ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मात्र 3 मतों के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ हरियाणा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बना रहा।
महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में निर्विरोध निर्वाचन
कई राज्यों में मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी क्योंकि वहां उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए थे। महाराष्ट्र में सभी सात सीटों पर उम्मीदवारों का चयन बिना किसी विरोध के हुआ, जिनमें छह महायुति गठबंधन से और एक विपक्षी महा विकास आघाडी के शरद पवार शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चार उम्मीदवारों और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने निर्विरोध जीत हासिल की और तेलंगाना में कांग्रेस के अभिषेक सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इसी तरह तमिलनाडु में छह और हिमाचल प्रदेश में एक सीट पर उम्मीदवारों का चयन निर्विरोध संपन्न हुआ।
