अमेरिका और ईरान के बीच घोषित सीजफायर के बावजूद मिडिल ईस्ट में युद्ध की ज्वाला शांत होती नहीं दिख रही है। इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में लेबनान में इजराइली हमलों के कारण कम से कम 250 लोगों की जान जा चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित 14 दिवसीय शांति समझौते के बीच इस सैन्य कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। अधिकारियों के अनुसार, लेबनान की राजधानी बेरूत में सबसे अधिक 91 लोगों की मौत हुई है।
10 मिनट में 100 ठिकानों पर भीषण हवाई हमला
इजराइली वायुसेना ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को तेज करते हुए महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर, खुफिया मुख्यालय और मिसाइल भंडारण केंद्रों को पूरी तरह ध्वस्त करने का दावा किया गया है। आईडीएफ के अनुसार, सीजफायर की घोषणा के बाद से अब तक लेबनान पर 160 से ज्यादा बम गिराए जा चुके हैं। यह हमला बेरूत, बेका घाटी और दक्षिणी लेबनान के विभिन्न हिस्सों में एक साथ किया गया, जिससे हिज्बुल्लाह के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
ज़ूम मीटिंग के दौरान हिज्बुल्लाह अधिकारियों पर प्रहार
इस सैन्य अभियान का सबसे चौंकाने वाला पहलू हिज्बुल्लाह के अधिकारियों पर किया गया सटीक हमला है। दावों के अनुसार, इजराइली खुफिया तंत्र ने हिज्बुल्लाह की एक डिजिटल मीटिंग को ट्रैक किया जो ज़ूम (Zoom) प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित हो रही थी। इस वर्चुअल मीटिंग में हिज्बुल्लाह के 100 से अधिक सदस्य और अधिकारी शामिल थे। आईडीएफ ने मीटिंग की लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन ठिकानों पर एक साथ मिसाइलें दागीं। इस हमले ने हिज्बुल्लाह के संचार और समन्वय तंत्र को बड़ी चुनौती दी है।
बेरूत में बुनियादी ढांचे और रिहाइशी इलाकों में तबाही
इजराइली बमबारी का असर लेबनान की राजधानी बेरूत के रिहाइशी और व्यावसायिक इलाकों पर भी पड़ा है और तटीय इलाकों में स्थित बड़ी इमारतों और एक व्यस्त रेस्टोरेंट पर हुए हमले के बाद पूरा क्षेत्र धुएं के गुबार में तब्दील हो गया। इसके अतिरिक्त, लेबनान के हर्मेल क्षेत्र में एक पेट्रोल पंप पर की गई एयर स्ट्राइक की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसमें कुछ ही सेकंड में पूरा पंप मलबे में बदल गया और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों से नागरिक बुनियादी ढांचे को अपूरणीय क्षति हुई है और मानवीय संकट गहरा गया है।
सीजफायर की शर्तों पर अमेरिका और ईरान में गहरा मतभेद
वर्तमान तनाव का मुख्य कारण सीजफायर की शर्तों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच अलग-अलग व्याख्याएं हैं। अमेरिका का आधिकारिक रुख यह है कि लेबनान में जारी संघर्ष इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं था और इसके विपरीत, ईरान का दावा है कि लेबनान में शांति स्थापित करना समझौते की प्राथमिक शर्तों में शामिल था। इस बीच, ईरान के लवान द्वीप पर यूएई द्वारा की गई बमबारी और जवाब में ईरान द्वारा बहरीन व कुवैत में किए गए हमलों ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर अनसुलझा विवाद
शांति वार्ता के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मार्ग अभी तक व्यापार के लिए नहीं खोला गया है। अमेरिका इस मार्ग को खुलवाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है, जबकि ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा चिंताओं से जोड़ रखा है। इसके साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर भी पेंच फंसा हुआ है। ईरान का कहना है कि उसे अभी तक संवर्धन का अधिकार नहीं दिया गया है, जो किसी भी स्थायी शांति समझौते के लिए आवश्यक है। इन अनसुलझे मुद्दों और दोनों पक्षों की ओर से जारी बयानबाजी के कारण 14 दिवसीय शांति समझौते के भविष्य पर संशय बना हुआ है।
