ITR फाइलिंग 2025-26: रिटर्न भरते समय इन गलतियों से बचें वरना मिल सकता है नोटिस

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे फॉर्म के चयन और आय के खुलासे में सावधानी बरतें, क्योंकि छोटी सी चूक भी आयकर विभाग के नोटिस और भारी जुर्माने का कारण बन सकती है।

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है, जो देश भर के करदाताओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस प्रक्रिया को काफी सरल बना दिया गया है, लेकिन जल्दबाजी या जानकारी के अभाव में की गई गलतियों के कारण आयकर विभाग से नोटिस मिलने का जोखिम अभी भी बना रहता है और विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न दाखिल करते समय की गई एक छोटी सी लापरवाही भी टैक्सपेयर्स को आयकर विभाग के नोटिस, रिफंड में देरी या अतिरिक्त टैक्स और जुर्माने जैसी गंभीर परेशानियों में डाल सकती है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, जिसका आकलन वर्ष 2026-27 है, रिटर्न भरने की प्रक्रिया जारी है और करदाताओं को अपनी प्रविष्टियों में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।

विभिन्न श्रेणियों के लिए निर्धारित समय सीमा

देर से रिटर्न दाखिल करने पर लगने वाले जुर्माने से बचने के लिए करदाताओं को विभाग द्वारा तय की गई समय सीमा का ध्यान रखना अनिवार्य है। व्यक्तिगत करदाताओं, जिन्हें ITR-1 और ITR-2 दाखिल करना होता है, उनके लिए रिटर्न जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, जो करदाता ITR-3 और ITR-4 की श्रेणी में आते हैं, उनके लिए विभाग ने 31 अगस्त 2026 की तारीख तय की है। इन तारीखों को चूकने पर न केवल जुर्माना लगता है, बल्कि यह नुकसान को आगे ले जाने या कुछ विशेष कटौती का दावा करने की प्रक्रिया को भी जटिल बना सकता है। इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि सभी दस्तावेजों को व्यवस्थित करके समय से पहले फाइलिंग पूरी कर लें।

गलत ITR फॉर्म के चयन का गंभीर परिणाम

ITR फाइल करते समय करदाताओं द्वारा की जाने वाली सबसे आम और गंभीर गलतियों में से एक गलत फॉर्म का चयन करना है। आयकर विभाग ने करदाता की आय की प्रकृति और उनके पेशे के आधार पर अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए हैं। उदाहरण के तौर पर, ITR-1 मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारियों और सीमित आय वाले व्यक्तियों के लिए बनाया गया है। इसके विपरीत, यदि कोई व्यक्ति व्यवसाय या किसी पेशे से आय अर्जित करता है, तो उसके लिए ITR-3 लागू होता है। यदि कोई करदाता अपनी आय के स्रोत के अनुसार गलत फॉर्म भर देता है, तो आयकर विभाग उस रिटर्न को डिफेक्टिव रिटर्न यानी त्रुटिपूर्ण रिटर्न घोषित कर सकता है। ऐसी स्थिति में करदाता को नोटिस भेजा जाता है और उन्हें एक निश्चित समय के भीतर दोबारा सही रिटर्न दाखिल करनी पड़ती है।

आकलन वर्ष और व्यक्तिगत विवरण की शुद्धता

अक्सर करदाता वित्त वर्ष (FY) और आकलन वर्ष (AY) के बीच भ्रमित हो जाते हैं, जिससे रिटर्न में गलतियां हो जाती हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए फाइल किए जा रहे रिटर्न के लिए सही आकलन वर्ष 2026-27 है। यदि रिटर्न में गलत वर्ष का चयन किया जाता है, तो प्रोसेसिंग में समस्या आ सकती है और टैक्स रिकॉर्ड में विसंगतियां पैदा हो सकती हैं और इसके अलावा, व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पैन नंबर और जन्मतिथि को सही-सही भरना बहुत जरूरी है। यह जानकारी पैन डेटाबेस में दर्ज विवरण से पूरी तरह मेल खानी चाहिए। किसी भी प्रकार का अंतर रिटर्न की प्रोसेसिंग को रोक सकता है। रिफंड के हकदार करदाताओं को अपने बैंक खाते का नंबर और IFSC कोड भी बहुत सावधानी से भरना चाहिए, क्योंकि गलत विवरण के कारण रिफंड अटक सकता है।

आय के सभी स्रोतों का पूर्ण खुलासा अनिवार्य

कई टैक्सपेयर्स केवल अपने वेतन से होने वाली आय की जानकारी देते हैं और अन्य स्रोतों से हुई कमाई को छिपा लेते हैं या भूल जाते हैं। यह एक गंभीर गलती है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, बचत खाते पर मिलने वाला ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज, किराये से होने वाली आय, और शेयर या म्यूचुअल फंड से प्राप्त कैपिटल गेन जैसे सभी स्रोतों का खुलासा करना अनिवार्य है। भले ही आपकी कुछ आय टैक्स-फ्री यानी कर-मुक्त हो, फिर भी उसकी जानकारी रिटर्न में देना आवश्यक है। विभाग के पास मौजूद डेटा के साथ आपकी जानकारी मेल न खाने पर नोटिस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है और इसलिए, रिटर्न जमा करने से पहले अपने सभी वित्तीय विवरणों का मिलान अवश्य कर लें।

फॉर्मेट का पालन और अंतिम जांच की महत्ता

ITR फॉर्म में जानकारी भरने के लिए एक निश्चित प्रारूप या फॉर्मेट तय किया गया है और यदि तारीख, बैंक विवरण या आय के आंकड़े गलत प्रारूप में भरे जाते हैं, तो रिटर्न में तकनीकी त्रुटियां आ सकती हैं। उदाहरण के लिए, तारीख को हमेशा DD/MM/YYYY के फॉर्मेट में ही दर्ज किया जाना चाहिए। इसी तरह, अन्य सभी कॉलम को भी दिए गए निर्देशों के अनुसार ही भरना चाहिए। रिटर्न को फाइनल सबमिट करने से पहले एक बार सभी जानकारियों की दोबारा गहनता से जांच करना बेहतर रहता है। सभी कॉलम को सही ढंग से भरने से न केवल रिटर्न की प्रोसेसिंग सुचारू रूप से होती है, बल्कि भविष्य में आयकर विभाग के साथ किसी भी कानूनी या वित्तीय उलझन की संभावना भी कम हो जाती है।