महिला खिलाडियों के साथ यौन शोषण के हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह मामला पिछले काफी समय से देश की राजनीति और खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ था। कोर्ट ने न केवल बृजभूषण शरण सिंह को राहत दी है, बल्कि उनके सहयोगी विनोद तोमर को भी इस मामले में बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों में खुशी की लहर है, जबकि यह कानूनी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
अदालत का फैसला और कानूनी प्रक्रिया
स्पेशल जज अश्विनी पंवार ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए बंद कमरे में अपना फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्यों और दलीलों को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि 10 मई 2024 को इसी अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 354A के तहत आरोप तय किए थे। इसके साथ ही उनके सहयोगी विनोद तोमर के खिलाफ भी इन्हीं धाराओं में आरोप तय किए गए थे। महिला पहलवानों ने उन पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद यह कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई थी।
बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह का बयान
अदालत से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह अभी इस विषय पर अधिक कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अदालत ने उन्हें तीन साल के लंबे इंतजार के बाद बरी किया है। उन्होंने अपने पुराने बयान को याद करते हुए कहा कि जिस दिन यह आरोप लगे थे, उसी दिन उन्होंने इसे एक गहरी साजिश करार दिया था। सिंह ने कहा कि आज वही सच साबित हुआ है जो उन्होंने पहले कहा था और उन्होंने आगे कहा कि उन्हें स्वयं पर पूरा विश्वास था और उन्होंने कभी भी अपने आप को अपराधी नहीं माना। उन्होंने यह भी कहा कि वह उन लोगों के हक के लिए लड़ रहे थे जिनका हक मारा जा रहा था। उन्होंने विश्वास जताया कि अब खिलाड़ी दुनिया में देश का परचम लहराएंगे। अपने बयान के अंत में उन्होंने "होइहि सोइ जो राम रचि राखा" कहकर अपनी आस्था व्यक्त की।
मामले की पृष्ठभूमि और पहलवानों का प्रदर्शन
यह पूरा विवाद साल 2023 में शुरू हुआ था जब देश के कई दिग्गज महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। पहलवानों का आरोप था कि रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने महिला खिलाडियों का यौन उत्पीड़न किया, उन्हें डराया-धमकाया और उनका पीछा किया और इन आरोपों के विरोध में देश के नामी पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों तक लंबा विरोध प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था और खेल प्रशासन में सुधार की मांग तेज हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और पुलिस जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप किया था, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की गहन जांच की और जून 2023 में अदालत के समक्ष लगभग 1500 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की थी। इस चार्जशीट में पुलिस ने मामले से जुड़े तमाम गवाहों के बयान और सबूतों को शामिल किया था। इसके बाद मई 2024 में इस केस का नियमित ट्रायल शुरू हुआ था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के परीक्षण के बाद अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी करने का आदेश दिया है।
