पीएम मोदी का 76वां जन्मदिन: फ्रैजाइल 5 से दुनिया की सबसे तेज इकोनॉमी बनने का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर भारत की आर्थिक प्रगति की चर्चा हो रही है। पिछले 12 वर्षों में देश 'फ्रैजाइल-5' से निकलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है। विदेशी मुद्रा भंडार 785 अरब 70 करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर है और जनधन खातों में 3 लाख 17 हजार करोड़ रुपये जमा हैं।

आज 17 सितंबर 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल के 12 साल से भी अधिक का समय सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। जब उन्होंने 2014 में सत्ता की कमान संभाली थी, तब की आर्थिक स्थितियों और आज के भारत के बीच एक विशाल अंतर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। एक समय था जब वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था को 'फ्रैजाइल-5' यानी दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में गिना जाता था। हालांकि, आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं और भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का गौरव हासिल कर चुका है और प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर हम उन पांच प्रमुख आंकड़ों का विश्लेषण करेंगे जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग, बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप जगत की तस्वीर बदल दी है।

जीडीपी में निरंतर शानदार प्रदर्शन और आर्थिक मजबूती

किसी भी देश की आर्थिक शक्ति का सबसे सटीक पैमाना उसकी जीडीपी विकास दर होती है। भारत के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2027 की अप्रैल-जून तिमाही में भारत की रियल जीडीपी में 7 दशमलव 8 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में भी 8 दशमलव 2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। निवेश के मोर्चे पर 11 दशमलव 9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि घरेलू खपत में 7 दशमलव 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। निर्यात यानी एक्सपोर्ट में भी 12 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है। इन मजबूत आंकड़ों के आधार पर भारत की नॉमिनल जीडीपी का अनुमान लगभग 4 ट्रिलियन 15 अरब डॉलर लगाया जा रहा है। ये आंकड़े वैश्विक व्यापारिक अस्थिरता के बीच भारत की मजबूती को दर्शाते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक रिकॉर्ड

देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है और इस मामले में भारत ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 785 अरब 70 करोड़ डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक आंकड़े के साथ भारत अब दुनिया में विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाला चौथा सबसे बड़ा देश बन गया है। आरबीआई के डेटा से यह भी पता चलता है कि पिछले 10 हफ्तों से भंडार में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। केवल इन 10 हफ्तों के भीतर ही देश के खजाने में लगभग 120 अरब डॉलर की भारी राशि जुड़ी है। यह विशाल भंडार किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट की स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

जनधन योजना से आई वित्तीय क्रांति

देश के प्रत्येक नागरिक को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना ने धरातल पर बड़े बदलाव किए हैं। 2 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के लाभार्थियों की कुल संख्या 59 करोड़ 21 लाख के पार पहुंच गई है। इन करोड़ों बैंक खातों में आम नागरिकों ने अपनी छोटी-छोटी बचत के माध्यम से 3 लाख 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की है। इसके साथ ही, लेनदेन को आसान बनाने के लिए 41 करोड़ 39 लाख रुपे डेबिट कार्ड भी जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण बात महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है, जिनके नाम पर 32 करोड़ 98 लाख खाते हैं। इसके अलावा, 46 करोड़ 3 लाख खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों के हैं, जो यह दर्शाता है कि वित्तीय समावेशन का लाभ देश के कोने-कोने तक पहुंच रहा है।

नेशनल हाईवे नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार

व्यापार और विकास को गति देने के लिए सड़कों का जाल बिछाना सरकार की प्राथमिकता रही है और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में पिछले एक दशक में नेशनल हाईवे नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव आया है। वित्तीय वर्ष 2014 में देश में नेशनल हाईवे का कुल नेटवर्क केवल 91287 किलोमीटर था, जो आज बढ़कर 146572 किलोमीटर तक पहुंच गया है। इस वर्ष के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, साल 2004 से 2014 के बीच हर साल औसतन 4174 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण होता था। वहीं, 2014 से 2025 के बीच निर्माण की यह गति दोगुनी से भी अधिक हो गई है और अब हर साल औसतन 9704 किलोमीटर हाईवे बनाए जा रहे हैं। सड़कों का यह विस्तृत नेटवर्क देश की प्रगति को नई रफ्तार दे रहा है।

स्टार्टअप इकोसिस्टम में वैश्विक पहचान

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं के नए विचारों को सफल व्यवसाय में बदलने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2016 में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या केवल 502 थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 2 लाख 47 हजार के आंकड़े को पार कर गई है। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। सरकार ने स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं और अब स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए टर्नओवर की सीमा को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, डीपटेक स्टार्टअप के लिए यह सीमा 300 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो तकनीकी नवाचार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।