भारत चीन व्यापार: पीयूष गोयल और वांग वेनताओ की मुलाकात के बाद आर्थिक चिंताओं को सुलझाने को तैयार चीन

भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके चीनी समकक्ष वांग वेनताओ के बीच हुई बैठक के बाद चीन ने भारत की आर्थिक चिंताओं को दूर करने की इच्छा जताई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी चिनफिंग के बीच बनी सहमति के बाद यह एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद और व्यापारिक तनाव के बाद अब दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चीनी वाणिज्य मंत्री की भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद चीन ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि वह भारत की आर्थिक चिंताओं को संतुलित तरीके से सुलझाने के लिए पूरी तरह तैयार है और चीनी दूतावास का यह बयान दोनों देशों के बीच बेहतर आर्थिक सहयोग की एक नई उम्मीद जगाता है, जिसका सीधा लाभ दोनों देशों के व्यापारियों और आम जनता को मिल सकता है।

पीयूष गोयल और चीनी मंत्री के बीच अहम चर्चा

चीन की ओर से यह सकारात्मक रुख तब सामने आया है जब भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने चीनी समकक्ष वांग वेनताओ के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। रविवार को पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि उन्होंने चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेनताओ के साथ एक विशेष बैठक की है, जिसमें भारत और चीन के व्यापारिक संबंधों को लेकर विस्तार से बातचीत की गई। इस बातचीत के ठीक एक दिन बाद भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता यू जिंग का बयान आया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति को धरातल पर लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।

पीएम मोदी और शी चिनफिंग की मुलाकात का असर

व्यापारिक रिश्तों में आई इस नई गर्माहट को हाल ही में हुई ब्रिक्स (BRICS) समिट के नतीजों से जोड़कर देखा जा रहा है। 2 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात की थी। उस समय शी चिनफिंग ने कहा था कि भारत और चीन को एक-दूसरे को खतरे या प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझीदार के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए एक तार्किक और सकारात्मक सोच की जरूरत है। चीनी प्रवक्ता यू जिंग ने भी इसी बात को दोहराते हुए कहा कि भारत चीन का एक बेहद अहम पड़ोसी है और आर्थिक क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों की कंपनियों को सीधा लाभ होगा।

व्यापार घाटा कम करना है सबसे बड़ी चुनौती

भले ही चीन अभी रिश्ते सुधारने और सहयोग की बात कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत में दोनों देशों के बीच मौजूद व्यापार असंतुलन एक बहुत बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के अप्रैल से जुलाई के बीच भारत ने चीन को करीब 7 अरब 80 करोड़ डॉलर का निर्यात किया। वहीं, इसी दौरान चीन से 52 अरब 70 करोड़ डॉलर का आयात किया गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत ने चीन से 131 अरब 60 करोड़ डॉलर का भारी भरकम सामान खरीदा था, जबकि भारत का कुल निर्यात सिर्फ 19 अरब 50 करोड़ डॉलर तक ही सीमित रहा था।

भारतीय कंपनियों के लिए नई राह की उम्मीद

इस भारी अंतर की वजह से भारत को 112 अरब डॉलर से ज्यादा के व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। अब भारत की मुख्य कोशिश यही रहेगी कि चीन के बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को आसान बनाया जाए। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन के इस नए रुख से इस भारी घाटे को कम करने में भारतीय अर्थव्यवस्था को कितनी मदद मिलती है। अगर चीन अपनी बातों को हकीकत में बदलता है, तो आईटी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी भारतीय कंपनियों को चीन में काम करने और अपना विस्तार करने के नए और बेहतर अवसर मिल सकते हैं। चीन ने अब भारत को दुश्मन की जगह साझीदार मानने की बात कही है, जो भविष्य के व्यापारिक समीकरणों को बदल सकता है।