चीन की सोने की महा-खोज: एक साल में निकाला 3174 टन सोना, समुद्र में भी मिला खजाना

चीन ने 2025 में 3174 टन सोना निकालकर दुनिया को चौंका दिया है। लियाओनिंग और प्रशांत महासागर में मिली विशाल खोजों के साथ चीन अपनी सोने की आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा है और डॉलर पर निर्भरता कम कर रहा है।

चीन इन दिनों सोने की खोज में पूरी दुनिया में सबसे आगे निकल गया है। वह न केवल अपनी जमीन के भीतर बल्कि समुद्र की गहराइयों में भी सोने के विशाल भंडारों की तलाश कर रहा है। चीन के सरकारी बैंक एक तरफ भारी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, तो दूसरी तरफ देश के भीतर से सोना निकालने के प्रयासों में भी तेजी आई है। इन कोशिशों का नतीजा यह रहा कि बीते साल यानी 2025 में चीन ने कुल 3174 टन सोना निकाला है। चीनी वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों की टीमों ने जमीन से लेकर समंदर के नीचे तक एक के बाद एक कई बड़े गोल्ड रिजर्व खोजे हैं। इनमें सबसे ताजा और चौंकाने वाली खोज प्रशांत महासागर के भीतर हुई है, जिसने दुनिया भर के विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

लियाओनिंग प्रांत में मिली ऐतिहासिक सफलता

चीन में इस दौर की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण खोज लियाओनिंग प्रांत में दर्ज की गई है। चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय (Natural Resources Ministry) की रिपोर्ट के अनुसार, यहां के दादोंगगौ रिजर्व में लगभग 25 दशमलव 86 लाख टन गोल्ड अयस्क मौजूद है। इस अयस्क का औसत ग्रेड 0 दशमलव 56 ग्राम प्रति टन आंका गया है। इसका मतलब है कि यहां कुल मिलाकर करीब 1444 टन सोना छिपा है। कुछ मीडिया अनुमानों के मुताबिक, इस सोने की कुल कीमत 192 अरब डॉलर तक हो सकती है। साल 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से यह देश में मिला अब तक का सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस विशाल भंडार को खोजने में वैज्ञानिकों को केवल 15 महीने का समय लगा।

साल 2025 के दौरान हुई अन्य प्रमुख खोजें

सोने की खोज का यह सिलसिला केवल लियाओनिंग तक सीमित नहीं रहा और जनवरी 2025 में ही चीन के तीन अलग-अलग माइनिंग क्षेत्रों से कुल 168 टन सोना मिलने की पुष्टि हुई थी। इसमें गांसू प्रांत के अनबाली नॉर्थ एरिया से 102 दशमलव 4 टन, इनर मंगोलिया के हदामेंगू एरिया से 41 दशमलव 3 टन और हेइलोंगजियांग के बाओशिंगगौ एरिया से 24 दशमलव 3 टन सोना मिला। इसके अलावा, शिनजियांग के कुनलुन पर्वत क्षेत्र में भी 1000 टन से ज्यादा के अनुमानित गोल्ड रिजर्व होने की खबरें सामने आईं, जिसने चीन की सोने की क्षमता को और मजबूती दी है।

समुद्र के नीचे छिपा है सोने का भंडार

चीन ने अपनी खोज का दायरा समुद्र के भीतर भी फैला दिया है और शानडोंग प्रांत के जियाओडोंग प्रायद्वीप में स्थित लाइझोऊ में एशिया का सबसे बड़ा अंडरसी गोल्ड डिपॉजिट मिला है। सानशान आइलैंड (हाइयु) गोल्ड माइन में 562 टन का कन्फर्म्ड रिजर्व पाया गया है। इस खोज के बाद लाइझोऊ क्षेत्र का कुल कन्फर्म्ड गोल्ड रिजर्व 3900 टन से ज्यादा हो गया है, जो चीन के कुल राष्ट्रीय रिजर्व का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा है। इसके साथ ही, प्रशांत महासागर में भी एक बड़ी सफलता मिली है और शेनझेन से रवाना हुए जहाज शियांग यांग होंग 10 पर सवार वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने ताइवान और फिलीपींस के उत्तर में समुद्र तल पर तीन बड़े सल्फाइड टीले खोजे हैं। शुरुआती जांच में यहां के अयस्क में 15 दशमलव 4 ग्राम सोना और 1 दशमलव 27 किलोग्राम चांदी प्रति टन तक पाई गई है।

चीन की इस आक्रामक खोज के पीछे के कारण

चीन आखिर इतनी शिद्दत से सोने की खोज क्यों कर रहा है, इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। पहला कारण भौगोलिक है; चीन कई टेक्टॉनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित है, जिससे वहां हाइड्रोथर्मल सिस्टम बनता है और सोने के भंडार जमा होते हैं। दूसरा बड़ा कारण सरकार का भारी निवेश है। पिछले साल चीन ने भूवैज्ञानिक अन्वेषण पर 115 अरब 99 करोड़ युआन खर्च किए। साल 2021 से अब तक यह खर्च 450 अरब युआन तक पहुंच चुका है। चीन अब एआई-बेस्ड मिनरल मॉडलिंग और हाई-पावर ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसके अलावा, चीन में सोने की घरेलू मांग बहुत ज्यादा है और साल 2024 की पहली तीन तिमाहियों में चीन ने 741 दशमलव 7 टन सोने की खपत की, जबकि उसका उत्पादन केवल 268 टन रहा। इस कमी को पूरा करने के लिए चीन घरेलू उत्पादन बढ़ाना चाहता है।

वैश्विक बाजार और रणनीतिक प्रभाव

सोने की कीमतों में आई भारी तेजी ने भी चीन को इस दिशा में प्रेरित किया है। अक्टूबर 2025 में सोने की कीमत 4000 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई। इतने बड़े गोल्ड रिजर्व मिलने से चीन की भू-राजनीतिक शक्ति और सोने की उत्पादन क्षमता में भारी इजाफा होगा। चीन अपनी अर्थव्यवस्था को डॉलर की निर्भरता से मुक्त करने के लिए गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है और लियाओनिंग की माइन के लिए चीन ने 2024 से 2027 के बीच 20 अरब युआन यानी करीब 2 अरब 82 करोड़ डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। वहीं, शानडोंग की अंडरसी माइन में 2000 मीटर गहराई तक खुदाई के लिए 10 अरब युआन यानी 1 अरब 40 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की गई है। हालांकि गहरे समुद्र से सोना निकालना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन ये खोजें चीन को भविष्य के लिए एक मजबूत रणनीतिक बढ़त प्रदान करती हैं।