इंग्लैंड क्रिकेट टीम में एक बार फिर बड़ा बदलाव होने जा रहा है और जो रूट को दोबारा टेस्ट टीम का कप्तान बनाया जा सकता है। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) का यह फैसला काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है क्योंकि बेन स्टोक्स से पहले जो रूट ही इंग्लिश टीम के कप्तान थे। अब एक बार फिर उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी जाने वाली है। रिपोर्टों के अनुसार, बेन स्टोक्स के बाद हैरी ब्रूक को यह जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है, बल्कि चयनकर्ता एक बार फिर जो रूट के अनुभव पर भरोसा करना चाहते हैं।
हैरी ब्रूक को क्यों नहीं मिली जिम्मेदारी
हैरी ब्रूक वर्तमान में इंग्लैंड की वनडे और टी20 टीम के कप्तान हैं। हालांकि ब्रूक ने हाल ही में एक बयान दिया था कि अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वह टेस्ट कप्तानी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ईसीबी उन्हें तीनों फॉर्मेट की जिम्मेदारी देकर उन पर काम का बोझ नहीं बढ़ाना चाहता और यही कारण है कि चयनकर्ताओं ने हैरी ब्रूक के बजाय जो रूट को कप्तान बनाने का मन बनाया है। ईसीबी का मानना है कि तीनों फॉर्मेट में एक ही कप्तान होने से खिलाड़ी के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है, इसलिए वे टेस्ट के लिए रूट जैसे अनुभवी खिलाड़ी को वापस लाना चाहते हैं।
जो रूट का कप्तानी का इतिहास
जो रूट के कप्तानी के सफर की बात करें तो वह साल 2017 में पहली बार इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बने थे। उन्होंने दिग्गज खिलाड़ी एलिस्टर कुक की जगह ली थी और वह इंग्लैंड के 80वें टेस्ट कप्तान बने थे। जो रूट ने लगभग पांच साल तक टीम का नेतृत्व किया और साल 2022 में उन्होंने इंग्लैंड की कप्तानी छोड़ दी थी। उनके कप्तानी छोड़ने के बाद बेन स्टोक्स को यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन अब चक्र एक बार फिर घूमकर रूट पर आ गया है।
कप्तानी के आंकड़े और शानदार प्रदर्शन
जो रूट का बतौर कप्तान रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है और उन्होंने इंग्लैंड के लिए कुल 65 टेस्ट मैचों में कप्तानी की है। इस दौरान उनके नेतृत्व में टीम को 27 मैचों में जीत मिली और 27 मैचों में ही हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह है कि वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा टेस्ट मैच जीतने वाले कप्तान हैं। कप्तानी के दबाव के बावजूद जो रूट के बल्ले ने जमकर रन उगले। उन्होंने बतौर कप्तान टेस्ट क्रिकेट में 46 दशमलव 71 की औसत से कुल 5418 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 15 शानदार शतक भी निकले हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि कप्तानी का उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा था, बल्कि उन्होंने टीम को कई यादगार जीत दिलाई थीं। अब ईसीबी एक बार फिर उन्हीं के मार्गदर्शन में टेस्ट टीम को आगे ले जाना चाहता है।
