कश्मीरी पंडितों को धमकी: जम्मू शिफ्ट होने पर भी नहीं बचेंगे, यूएलसी की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) ने कश्मीरी पंडितों को धमकी भरा पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि जम्मू जाने पर भी वे सुरक्षित नहीं रहेंगे और उन पर नजर रखी जा रही है।

कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक शैडो फ्रंट ग्रुप, जिसे यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से जाना जाता है, ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक नया और बेहद डरावना धमकी भरा नोट जारी किया है। इस पत्र के सामने आने के बाद पूरी घाटी में हड़कंप मच गया है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हो गई हैं। इस धमकी भरे नोट में न केवल चेतावनी दी गई है, बल्कि 6 सरकारी कर्मचारियों के नाम और उनके फोन नंबर भी सार्वजनिक किए गए हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

जम्मू में भी सुरक्षित नहीं रहने की चेतावनी

इस धमकी भरे पत्र की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कश्मीरी पंडितों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वे घाटी छोड़कर जम्मू जाने के बाद भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। संगठन ने अपने नोट में लिखा है कि इस बार वे जम्मू में भी नहीं छिप पाएंगे और जरूरत पड़ने पर आतंकी वहां भी उनका पीछा करेंगे और यह बयान उन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सुरक्षा कारणों से जम्मू शिफ्ट होने का विचार कर रहे थे या वहां शरण लेने की योजना बना रहे थे। पत्र में यह भी साफ किया गया है कि 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने का बहाना अब नहीं चलेगा और उन्हें कहीं भी निशाना बनाया जा सकता है।

राजस्व विभाग और सरकारी कर्मचारियों पर नजर

यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ने दावा किया है कि वह सरकारी विभागों, विशेष रूप से राजस्व विभाग पर कड़ी नजर रख रहा है और इस विभाग में बड़ी संख्या में वे कश्मीरी पंडित तैनात हैं जो सरकारी पैकेज के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे इन कर्मचारियों की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे उनके नाम और फोन नंबर सार्वजनिक करने का मुख्य उद्देश्य उन्हें असुरक्षित महसूस कराना और लक्षित हमलों के लिए उनकी पहचान को उजागर करना है।

स्थानीय पुलिस और पहुंच का दावा

धमकी भरे नोट में सुरक्षा बलों की संरचना को लेकर भी टिप्पणी की गई है। इसमें कहा गया है कि पुलिस बल में 90 प्रतिशत से अधिक स्थानीय निवासी शामिल हैं, जो इसी समाज के बीच रहते हैं, उनके साथ त्योहार मनाते हैं और घुलते-मिलते हैं। संगठन का तर्क है कि इस वजह से किसी को भी कहीं भी और कभी भी निशाना बनाना उनके लिए बहुत आसान है और पत्र में आगे कहा गया है कि अगर इन प्रवासी पंडितों को लगता है कि वे उनकी पहुंच से बाहर हैं, तो वे बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। संगठन ने दावा किया है कि उनके पास इन कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों और उनके ठिकानों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध है।

धमकी के पीछे का कारण

इस आतंकी समूह ने धमकी दी है कि अगर प्रशासन द्वारा आतंकवाद के समर्थकों और लड़ने वालों की संपत्ति को कुर्क या जब्त किया गया, तो वे सुरक्षा कर्मचारियों और प्रशासन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेंगे। यह स्पष्ट करता है कि आतंकी संगठन सरकारी कार्रवाई के विरोध में कश्मीरी पंडितों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह कदम घाटी में डर का माहौल पैदा करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पुरानी धमकियां और वर्तमान स्थिति

यह पहली बार नहीं है जब कश्मीरी पंडितों को इस तरह की धमकियां मिली हैं और इससे पहले फरवरी 2026 में भी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े टीआरएफ (TRF) ने कश्मीरी पंडितों को जान से मारने की धमकी दी थी। वर्तमान धमकी भरे पत्र पर 7 अगस्त 2026 की तारीख अंकित है। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब हाल ही में दो गैर-स्थानीय मजदूरों और एक पुलिस कांस्टेबल की टारगेट किलिंग की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा बल इस नई धमकी को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं और प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा है।