खुलासा: फ्रांस और बांग्लादेश जैसी खतरनाक साजिश भारत में भी रची गई, किरेन रिजिजू के इस बयान से मचा हड़कंप

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि भारत में भी फ्रांस और बांग्लादेश जैसी हिंसा फैलाने की खतरनाक साजिश रची गई थी। उन्होंने साफ किया कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल चुनावों के जरिए ही संभव है, सोरोस के जरिए नहीं।

केंद्रीय राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को विपक्ष पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। किरेन रिजिजू ने खुलकर कहा कि एसआईआर के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों की आड़ में भारत के भीतर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने की बेहद खतरनाक साजिश रची गई थी और उन्होंने दावा किया कि इस साजिश के तहत ठीक वैसी ही अशांति फैलाने की नापाक कोशिश की जा रही थी, जैसी हाल ही के दिनों में पड़ोसी देश बांग्लादेश और यूरोपीय देश फ्रांस में देखने को मिली थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कुछ भारत विरोधी गिरोहों और देश के भीतर सक्रिय कुछ खास नेताओं ने पूरी योजना के तहत मिलीभगत की है और उनका मकसद भोले-भाले युवाओं को गुमराह कर भड़काना और देश की सड़कों पर भारी हिंसा तथा अराजकता का माहौल पैदा करना था।

बांग्लादेश और फ्रांस जैसी अशांति फैलाने का था प्लान

अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपनी बात को और अधिक स्पष्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विस्तार से बताया कि बांग्लादेश में हुई हिंसक घटनाएं और फ्रांस की सड़कों पर हुए दंगे, आगजनी तथा लूटपाट जैसी घटनाएं अचानक नहीं हुई थीं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि ठीक इसी प्रकार की सुनियोजित साजिश भारत की शांति को भंग करने के लिए भी रची गई थी। भारत विरोधी ताकतों और कुछ राजनीतिक चेहरों ने आपस में हाथ मिलाकर युवाओं के मन में जहर घोला और सड़कों पर खून-खराबा तथा उग्र प्रदर्शन कराने का कुचक्र रचा था। रिजिजू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इलेक्टोरल रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर तीखा विरोध प्रदर्शन चल रहा है। इसी प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं और विभिन्न स्टूडेंट एक्टिविस्ट्स द्वारा सरकार को बदलने की बात कही गई थी, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है।

भारत में शासन परिवर्तन केवल चुनाव से मुमकिन

विपक्ष और भारत विरोधी ताकतों को कड़ी चेतावनी देते हुए किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि इस तरह की खतरनाक और देशविरोधी साजिशें रचने वाले लोग शायद यह भूल गए हैं कि उनका यह देश न तो बांग्लादेश है और न ही फ्रांस। उन्होंने बहुत कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि भारत जैसे विशाल और मजबूत लोकतंत्र में शासन या सत्ता परिवर्तन केवल और केवल लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से ही संभव है, किसी बाहरी ताकत या सोरोस के जरिए नहीं हो सकता। इस दावे के समर्थन में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक वीडियो भी शेयर किया। इस वीडियो में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए की अध्यक्ष नेहा बोरा और देश के जाने-माने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण खुलकर शासन परिवर्तन की वकालत करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ गया है और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।

प्रशांत भूषण और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ, रिजिजू के इन तमाम गंभीर आरोपों के जवाब में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सरकार के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रशांत भूषण ने अपनी सफाई में कहा कि सरकार लगातार यह बेबुनियाद आरोप लगाती रहती है कि यह पूरा आंदोलन विपक्ष की लीडरशिप में सरकार को गिराने या बदलने का कोई गुप्त ऑपरेशन है और उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम सब लोग तो केवल इस देश के चुनावी प्रजातंत्र और संविधान को बचाने के लिए एक शांतिपूर्ण अपील कर रहे हैं। प्रशांत भूषण ने यह भी जोड़ा कि अगर देश में इसी तरह की बर्बरता का दौर लगातार जारी रहता है, तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में सरकार में बदलाव जरूर आएगा। उन्होंने आगे सवालिया अंदाज में कहा कि हम सभी इस देश की सरकार बदलना चाहते हैं, तो क्या इसमें किसी भी प्रकार की कोई गलती है? प्रशांत भूषण का तर्क है कि सरकार बदलना इस देश के हर एक नागरिक का मौलिक प्रजातांत्रिक अधिकार है, और मौजूदा सरकार के खिलाफ असंतोष या नाराजगी पैदा करना देश में किसी भी लिहाज से कोई जुर्म नहीं माना जा सकता है। बहरहाल, देश में रिजिम चेंज और इस पूरी सियासी साजिश के मुद्दे पर राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है।