उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सवर्ण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया और प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी हालिया दिशा-निर्देशों को 'काला कानून' करार देते हुए जमकर नारेबाजी की। इस दौरान माहौल तब बदल गया जब उपमुख्यमंत्री स्वयं आवास से बाहर आए और प्रदर्शनकारियों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। उन्होंने मोर्चा के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना।
डिप्टी सीएम का संवाद और आश्वासन
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सवर्ण मोर्चा के नेताओं के साथ लंबी बैठक की और बैठक के दौरान पाठक ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी वर्गों के हितों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि वह स्वयं सामान्य वर्ग से आते हैं और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे और उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वह इस गंभीर मुद्दे को दिल्ली में उच्च नेतृत्व के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे, जिससे प्रदर्शनकारियों के बीच व्याप्त तनाव में कमी देखी गई।
सवर्ण मोर्चा की मुख्य आपत्तियां
सवर्ण मोर्चा के पदाधिकारियों ने यूजीसी के नए नियमों पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पंडित अभिनव नाथ त्रिपाठी और संयोजक संदीप सिंह के अनुसार, ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में सवर्ण समाज के छात्रों के विरुद्ध एक बड़ी साजिश का हिस्सा हैं। उनका आरोप है कि दलित एक्ट के मौजूदा प्रावधानों के बीच इन नए नियमों के आने से सवर्ण छात्रों के शैक्षणिक और सामाजिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। मोर्चा ने मांग की है कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
कानूनी प्रावधानों पर चिंता
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यदि इन नियमों को लागू किया जाता है, तो इसके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाएगी। मोर्चा के नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सवर्ण समाज को लक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई फर्जी मुकदमा दर्ज होता है, तो छात्र का पूरा भविष्य बर्बाद हो सकता है। सवर्ण मोर्चा ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार इन नियमों को पूरी तरह से वापस नहीं लेती, उनका विरोध प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
दिल्ली स्तर पर समाधान की मांग
बैठक में 50 से अधिक पदाधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि हालांकि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन से उन्हें उम्मीद जगी है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होना है और उन्होंने जोर देकर कहा कि यूजीसी के नियमों की आवश्यकता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब न्यायालय ने भी कुछ पहलुओं पर हस्तक्षेप किया है। अब सवर्ण समाज की नजरें दिल्ली में होने वाले संभावित फैसलों पर टिकी हैं।
