ममता बनर्जी का बड़ा आरोप: पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए टीएमसी विधायकों को धमका रही भाजपा

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस और ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर टीएमसी विधायकों को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में हलचल थमती नजर नहीं आ रही है और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान और बाहरी दबावों के बीच, पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भाजपा उनके विधायकों को डराने-धमकाने के लिए पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों का सहारा ले रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक से 60 विधायक नदारद रहे और पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में दो नेताओं को निष्कासित कर दिया है।

विधायकों को डराने और एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

सोशल मीडिया पर लाइव आकर ममता बनर्जी ने अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय सीधे सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से संवाद करेंगी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के विधायकों को पुलिस द्वारा डराया जा रहा है। उन्हें पार्टी तोड़ने और विशिष्ट व्यक्तियों से संपर्क करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया, "क्या यह प्रजातंत्र का उदाहरण है? विधायकों को डराया जा रहा है।

पार्टी के भीतर कार्रवाई और ममता का कड़ा रुख

टीएमसी के भीतर चल रही उथल-पुथल उस समय और स्पष्ट हो गई जब पार्टी द्वारा बुलाई गई बैठक में 60 विधायक शामिल नहीं हुए। इसी बीच, पार्टी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को निष्कासित करने का निर्णय लिया। इन चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी ने हार नहीं मानने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि आप जितनी भी ताकत लगा लें, तृणमूल कांग्रेस को तोड़ा नहीं जा सकता और उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ विधायकों या सांसदों को पैसे का लालच देकर या डराकर पार्टी को कमजोर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को झुकाया नहीं जा सकता और टीएमसी इन परिस्थितियों में और भी मजबूत होकर उभरेगी।

हिंसा और 177 सीटों पर धांधली का दावा

ममता बनर्जी ने राज्य में अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ हो रही हिंसा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि अब तक पार्टी के 2500 कार्यालय तोड़ दिए गए हैं और उनके कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को जुलूस निकालने, बैठकें करने या यहां तक कि अपने घरों से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 177 सीटों पर धांधली की गई है। उन्होंने राजारहाट के उम्मीदवार तापस का उदाहरण देते हुए कहा कि वे जीत गए थे, लेकिन अगले दिन रीकाउंटिंग के नाम पर उन्हें हारने पर मजबूर किया गया।

अभिषेक बनर्जी पर हमला और इलाज में लापरवाही

सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि जो लोग अभिषेक को बचाने गए थे, उन्हें ही गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर बाहरी थे जिन्हें एक दिन पहले लाया गया था। ममता के अनुसार, अगर अभिषेक ने हेलमेट नहीं पहना होता, तो पत्थरों के हमले से उनकी जान जा सकती थी। उन्होंने डेरेक ओ’ब्रायन के हवाले से बताया कि डॉक्टरों ने अभिषेक की आंतरिक चोटों की जांच के लिए 3 स्कैन और ओपीडी की सलाह दी थी, लेकिन उन्हें ओपीडी सेवा नहीं दी गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब लोगों को चिकित्सा उपचार से भी वंचित रखा जाएगा?

छात्र समुदाय से अपील

अपने संबोधन के अंत में ममता बनर्जी ने छात्र समुदाय से विशेष अपील की। उन्होंने छात्रों को समाज की रीढ़ बताते हुए कहा कि जो लोग बंगाली छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, उनके खिलाफ छात्रों को विरोध करना चाहिए। उन्होंने अपने छात्र जीवन के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है और अब छात्रों को भी समाज में हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।