पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज उस समय हड़कंप मच गया जब तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर शारीरिक हमला होने की खबर सामने आई। यह घटना सोनारपुर इलाके में हुई जहां भीड़ ने अचानक अभिषेक बनर्जी को घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि इस हमले के दौरान अभिषेक बनर्जी के साथ काफी बदसलूकी की गई और भीड़ ने उन पर थप्पड़ और लातों की बरसात कर दी और स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए। इतना ही नहीं, हमलावरों ने उन पर अंडे भी फेंके। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसे खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने साझा किया है।
ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया
अपने भतीजे और पार्टी के महत्वपूर्ण नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मारपीट का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर सीधा निशाना साधा। ममता बनर्जी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में लिखा कि शासक अब हत्यारे बन गए हैं और उन्होंने भाजपा पर शर्मिंदगी जताते हुए लिखा कि भाजपा पर शर्म आती है और मुख्यमंत्री के इस बयान ने राज्य में राजनीतिक सरगर्मी को और तेज कर दिया है और उन्होंने इस हमले को एक सोची-समझी साजिश के तौर पर पेश किया है।
विपक्षी नेताओं ने की हमले की कड़ी निंदा
अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले की गूंज दिल्ली तक सुनाई दे रही है और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेता श्री अभिषेक बनर्जी जी के ऊपर जानलेवा हमला करवाकर बंगाल की अराजक भाजपा सरकार ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा नफरत भरी नकारात्मक हिंसक राजनीति के सिवा और कुछ नहीं कर सकती है। अखिलेश यादव ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील वातावरण में भी पुलिस की व्यवस्था न होना एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करती है और उन्होंने इसे घोर निंदनीय करार दिया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सुरक्षा पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस हमले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में उन लोगों के परिजनों से मिलने गए थे जो हिंसा से प्रभावित हुए थे। खरगे ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि एक प्रमुख विपक्षी नेता को जानबूझकर पर्याप्त पुलिस सुरक्षा न देना भाजपा की प्रतिशोध और उत्पीड़न की राजनीति का प्रमाण है। उन्होंने मांग की कि पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार को सभी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और ऐसे हमलों को रोकने के लिए फौरन कदम उठाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेद किसी भी प्रकार की हिंसा को कभी भी उचित नहीं ठहरा सकते।
टीएमसी नेताओं ने गृह मंत्री से मांगा जवाब
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन ने इस घटना को लेकर गृह मंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल किया कि बंगाल में अभी क्या हो रहा है और दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लोकसभा नेता पर हमला कैसे हो गया। उन्होंने पूछा कि मतगणना के दिन सुरक्षा क्यों हटा ली गई थी और पुलिस उस समय कहां थी जब अभिषेक बनर्जी पर हमला हो रहा था। वहीं टीएमसी नेता कुनाल घोष ने भी इस हमले और अभद्र भाषा के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस घटना की तुलना राजीव गांधी के शासनकाल में सुरक्षा हटाए जाने के बाद हुए हमले से की और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए कि अभिषेक के आसपास इस तरह की हिंसा को इतने लंबे समय तक क्यों चलने दिया गया।
