टीएमसी में बगावत का तूफान: कल्याण बनर्जी ने अभिषेक के खिलाफ खोला मोर्चा, राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा

तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक कलह तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ममता बनर्जी को अल्टीमेटम दिया है। इस बीच, प्रकाश चिक बड़ाईक सहित तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और कलकत्ता हाईकोर्ट के झटके ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर मची हलचल को देखकर ऐसा लगता है जैसे हर दिन एक-एक पत्ती टूटकर गिर रही है। करीब डेढ़ महीने पहले तक टीएमसी एक बेहद मजबूत स्थिति में थी, जिसके पास सत्ता की पूरी ताकत, 200 से ज्यादा विधायक और 40 से ज्यादा सांसद थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि पार्टी के भीतर दरारें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि विधायक और सांसद लगातार साथ छोड़ रहे हैं।

राजनीतिक इतिहास में अभूतपूर्व गिरावट

भारतीय राजनीति के इतिहास में शायद ही किसी पार्टी का हाल चुनाव हारने के बाद इतनी जल्दी ऐसा हुआ होगा जैसा आज टीएमसी का है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन ने एक बार कहा था कि राजनीति में एक हफ्ता बहुत लंबा समय होता है, और टीएमसी इसका सबसे सटीक उदाहरण बनकर उभरी है। पार्टी में मची इस भगदड़ और टूट-फूट की गति इतनी तेज है कि आने वाले समय में यह राजनीतिक शोध का विषय बन सकती है।

कल्याण बनर्जी का अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विद्रोह

ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी मुसीबत उनके बेहद भरोसेमंद सांसद कल्याण बनर्जी की ओर से आई है। कल्याण बनर्जी, जिन्हें हाल ही में लोकसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक (चीफ व्हीप) बनाया गया था, ने अब बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। उन्होंने ममता बनर्जी को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि उन्हें अभिषेक बनर्जी और उनके बीच में से किसी एक को चुनना होगा। कल्याण बनर्जी का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने अभिषेक बनर्जी को पार्टी से हटाने तक की मांग कर दी।

कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि वह अभिषेक बनर्जी के कर्मचारी नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी वरिष्ठ नेताओं का अनादर करते हैं और उन्हीं की कार्यशैली के कारण पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने फर्जी सिग्नेचर के मामले में अभिषेक बनर्जी की पैरवी करने से भी इनकार कर दिया। कल्याण बनर्जी के बेटे शीर्षान्या बंद्योपाध्याय ने भी इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी किसी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण परिवार ने इस पूरे मामले से दूरी बनाने का फैसला किया है।

अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें और सीआईडी जांच

कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बीच विवाद तब और बढ़ गया जब अभिषेक ने कल्याण को कलकत्ता हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने से रोक दिया और इस बीच, फर्जी सिग्नेचर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को शाम 6 बजे तक सीआईडी के सामने पेश होने का आदेश दिया था। आदेश का पालन करते हुए अभिषेक बनर्जी दिल्ली से लौटने के बाद कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी कार्यालय पहुंचे। हालांकि, इस मामले में उन्हें फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलती नहीं दिख रही है।

राज्यसभा सांसदों का सामूहिक इस्तीफा

पार्टी को एक और बड़ा झटका राज्यसभा में लगा है। आज सुबह टीएमसी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसे मंजूर कर लिया गया है। प्रकाश चिक ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता का जनादेश भाजपा के पक्ष में था और उनके अपने क्षेत्र में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह भविष्य में शुभेंदु अधिकारी के निर्देशों के अनुसार काम करेंगे।

प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है। इससे पहले 8 जून 2026 को सुखेंदु शेखर राय ने इस्तीफा दिया था और फिर 10 जून को सुष्मिता देव ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया था। इस तरह महज कुछ ही दिनों के भीतर पार्टी के तीन महत्वपूर्ण राज्यसभा सांसद जा चुके हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा और अन्य नेताओं का रुख

इन तमाम नकारात्मक खबरों के बीच ममता बनर्जी के लिए राहत की खबर शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से आई। हालांकि, इससे पहले काफी सस्पेंस बना रहा क्योंकि शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष पूरे होने पर उन्हें सोशल मीडिया के जरिए बधाई दी थी। इससे अटकलें लगने लगी थीं कि वह भी पार्टी छोड़ सकते हैं। लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि मुश्किल समय में ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी थीं, इसलिए उनका नैतिक और राजनीतिक कर्तव्य है कि वह ममता के साथ बने रहें। उनके अलावा बाबुल सुप्रियो और प्रतिमा मंडल ने भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की है।

कलकत्ता हाईकोर्ट से लगा एक और झटका

ममता बनर्जी के लिए कानूनी मोर्चे पर भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ऋतब्रत बनर्जी की नेता प्रतिपक्ष (LoP) के पद पर हुई नियुक्ति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। टीएमसी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस नियुक्ति पर स्टे लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत देने से मना कर दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में बने रहेंगे, जो टीएमसी के लिए एक बड़ी रणनीतिक हार है।

सहयोगी दलों की चिंता

टीएमसी के भीतर चल रही इस उठापटक को उसके सहयोगी दल भी देख रहे हैं। शिवसेना और आम आदमी पार्टी जैसे दल, जो खुद भी अतीत में ऐसी ही टूट का शिकार हो चुके हैं, इस स्थिति पर दुख और गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं और हालांकि, वे इस आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन टीएमसी की यह कमजोरी विपक्षी एकता के लिए भी एक चुनौती बनती जा रही है।

वर्तमान में टीएमसी एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहां पुराने वफादारों और नई पीढ़ी के नेतृत्व के बीच का संघर्ष पार्टी की नींव हिला रहा है। ममता बनर्जी इस तूफान को कैसे शांत करती हैं, यह आने वाले समय में बंगाल की राजनीति की दिशा तय करेगा।