कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पुराने पीएफ खातों में भारी भरकम राशि जमा है जिसका अब तक कोई दावेदार सामने नहीं आया है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) के इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय खातों में कुल 9330 करोड़ 56 पैसे जमा हैं। यह एक ऐसी रकम है जिसे अब तक क्लेम नहीं किया गया है। ईपीएफओ अब अपने सदस्यों को इस बारे में जानकारी देने और उन्हें जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चला रहा है ताकि यह पैसा सही हकदारों तक पहुंच सके।
राज्यसभा में सरकार का आधिकारिक बयान
सरकार ने गुरुवार 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की। सांसद आर. गिरिराजन् ने सदन में ईपीएफ और अन्य पेंशन खातों में जमा कुल बिना दावे वाली राशि और इन खातों को लेकर सरकार की भविष्य की योजनाओं पर सवाल उठाया था और इस महत्वपूर्ण सवाल का जवाब देते हुए श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2026 तक इनऑपरेटिव ईपीएफ खातों में कुल 9330 करोड़ 56 पैसे की राशि जमा है। मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार इस पैसे को कर्मचारियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जागरूकता अभियान और निधि आपके निकट कार्यक्रम
0 कैंप के माध्यम से नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच ईपीएफ सेवाओं और इनऑपरेटिव खातों के बारे में जानकारी फैलाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चला रहा है। इनऑपरेटिव खातों में 9330 करोड़ 56 पैसे जैसी बड़ी रकम होने का सीधा मतलब यह है कि कई कर्मचारियों ने नौकरी बदलने या रिटायर होने के बाद अभी तक अपने ईपीएफ फंड का दावा नहीं किया है। यदि आप भी ऐसे कर्मचारियों में शामिल हैं जिनका पुराना पीएफ पैसा अटका हुआ है, तो आप निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके अपने इनऑपरेटिव ईपीएफ फंड का दावा कर सकते हैं।
क्या होता है इनऑपरेटिव ईपीएफ खाता?
ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, किसी भी पीएफ खाते को इनऑपरेटिव या निष्क्रिय तब माना जाता है जब उसमें एक निश्चित समय तक कोई नया योगदान नहीं आता है। विशेष रूप से रिटायरमेंट के बाद, विदेश में स्थायी रूप से बस जाने की स्थिति में या सदस्य की मृत्यु के मामले में यदि तीन साल तक खाते में कोई योगदान (कंट्रीब्यूशन) नहीं किया गया हो, तो उसे इनऑपरेटिव घोषित कर दिया जाता है। वर्तमान नियमों के अनुसार, सभी खातों पर तब तक ब्याज मिलता रहता है जब तक कि सदस्य की आयु 58 साल नहीं हो जाती।
निष्क्रिय खातों की श्रेणियां और ब्याज के नियम
ईपीएफओ ने इनऑपरेटिव खातों को बेहतर प्रबंधन के लिए दो मुख्य श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी उन इनऑपरेटिव खातों की है जिनमें यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) नहीं है। दूसरी श्रेणी में वे इनऑपरेटिव खाते आते हैं जिनमें पहले से ही यूएएन मौजूद है और जहां तक ब्याज का सवाल है, ईपीएफओ की वेबसाइट स्पष्ट करती है कि सदस्य के 58 साल का होने तक खाते पर ब्याज देय होता है। इसके बाद खाते की स्थिति और नियमों के आधार पर ब्याज का निर्धारण किया जाता है। 9330 करोड़ 56 पैसे की इस विशाल राशि में कई ऐसे खाते भी हो सकते हैं जिन पर ब्याज की गणना अभी भी जारी है।
पैसे निकालने या ट्रांसफर करने की प्रक्रिया
यदि आपका खाता इनऑपरेटिव हो गया है, तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आप अभी भी ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 के तहत आने वाली किसी कंपनी या संस्था में कार्यरत हैं, तो आपको अपनी पुरानी रकम को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अपने वर्तमान नए खाते में ट्रांसफर करवा लेना चाहिए। वहीं, यदि आप पूरी तरह से रिटायर हो चुके हैं, तो ईपीएफओ के निर्देशों का पालन करते हुए आप इस पूरी रकम की निकासी के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 9330 करोड़ 56 पैसे की इस राशि को जल्द से जल्द संबंधित कर्मचारियों के खातों में भेजा जाए।
ईपीएस पेंशन अकाउंट की कार्यप्रणाली
सदन में चर्चा के दौरान मंत्री ने एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (ईपीएस) 2026 के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ईपीएस के तहत पेंशन फंड एक पूल किया गया फंड होता है और इस फंड में नियोक्ता (एम्प्लॉयर) और केंद्र सरकार दोनों की ओर से योगदान दिया जाता है। करंदलाजे ने स्पष्ट किया कि जब कोई सदस्य या उसका परिवार पेंशन का हकदार बन जाता है, तो इसी फंड से उन्हें लाभ प्रदान किए जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन फायदों के लिए क्लेम करने की कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की गई है। ईपीएस के तहत पेंशन या पैसे निकालने का लाभ, बकाया राशि के साथ तब दिया जाता है जब क्लेम प्राप्त होते हैं और उनका सफलतापूर्वक निपटारा किया जाता है।
