राजधानी दिल्ली में आने वाले कुछ दिनों में बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिलने वाली है और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूस और चीन सहित कई प्रमुख देशों के दिग्गज नेता दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के दौरे को लेकर हो रही है। पुतिन के इस दिल्ली दौरे के दौरान हथियारों और सुरक्षा से जुड़े कई अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी तय है। इस यात्रा की एक बड़ी विशेषता यह है कि रूस अपने साथ नई पीढ़ी का जेट इंजन भी लेकर आ रहा है। इसके साथ ही, दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में शुमार ब्रह्मोस मिसाइल को और अधिक अपग्रेड करने की योजना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
ब्रह्मोस मिसाइल का आधुनिकीकरण और नई क्षमताएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की शुक्रवार को होने वाली मुलाकात से पहले, भारत और रूस ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को अपग्रेड करने की तैयारी के स्पष्ट संकेत दिए हैं। दोनों देश इस बात पर सहमत दिख रहे हैं कि ब्रह्मोस में नई क्षमताएं और अतिरिक्त फीचर्स जोड़े जाने चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य मिसाइल को और अधिक प्रभावी बनाना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति को बढ़ाना है। रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि भारत और रूस संयुक्त रूप से ब्रह्मोस का उत्पादन कर रहे हैं और अब इसे और बेहतर बनाने का सही समय आ गया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 और रक्षा तकनीक
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है और यह 12 और 13 सितंबर को आयोजित होगा। इस सम्मेलन के दौरान ही शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी और विशेष बात यह है कि दोनों नेताओं के बीच करीब एक महीने के भीतर यह दूसरी मुलाकात है। ब्रह्मोस मिसाइल, जो भारत और रूस का एक संयुक्त रक्षा प्रोजेक्ट है, वर्तमान में जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जाने वाले अलग-अलग वेरिएंट में उपलब्ध है। अब दोनों देशों की कोशिश इसे अगली पीढ़ी की क्षमताओं के साथ और ज्यादा सक्षम बनाने की है ताकि यह वैश्विक हथियार बाजार में अपनी धाक जमा सके।
रक्षा आयात के बदलते आंकड़े और रूस की भूमिका
सिपरी (SIPRI) के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 से 2025 के दौरान भारत के बड़े हथियारों के आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही है। यदि इसकी तुलना पिछले पांच वर्षों से की जाए, तो उस समय यह हिस्सेदारी करीब 51 प्रतिशत थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत ने हथियारों के मामले में रूस पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया है। हालांकि, ब्रह्मोस जैसे महत्वपूर्ण और सफल संयुक्त प्रोजेक्ट आज भी दोनों देशों के रक्षा संबंधों की गहराई और मजबूती को दर्शाते हैं और अब ध्यान केवल आयात पर नहीं, बल्कि संयुक्त उत्पादन और नई तकनीकों के विकास पर केंद्रित है।
भविष्य के रक्षा सहयोग पर बड़े फैसले की उम्मीद
अब पूरी दुनिया की नजरें प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली इस मुलाकात पर टिकी हैं। इस बैठक में ब्रह्मोस के अपग्रेडेशन के साथ-साथ नई रक्षा तकनीक, संयुक्त उत्पादन के नए क्षेत्रों और भविष्य के रक्षा सहयोग को लेकर कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। भारत के लिए ब्रह्मोस एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वदेशी-साझेदारी वाली मिसाइल परियोजना है। इसकी सुपरसोनिक गति और सटीक निशाना लगाने की क्षमता इसे दुनिया का एक अद्वितीय हथियार बनाती है। दोनों देशों का साझा लक्ष्य अब इसे और अधिक आधुनिक और घातक बनाना है ताकि यह भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम रहे।
