सत्य निकेतन हादसे में चौथी गिरफ्तारी, ‘Hostel Daze’ का PG ऑपरेटर सुधांशु अरेस्ट… 105000 रुपये महीना देते थे किराया

दिल्ली पुलिस ने सत्य निकेतन इमारत ढहने के मामले में चौथी गिरफ्तारी करते हुए पीजी ऑपरेटर सुधांशु को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस इमारत का किराया 105000 रुपये प्रति माह था। प्रशासन ने बगल की जर्जर इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के ढहने के मामले में कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई ने अब काफी रफ्तार पकड़ ली है। बुधवार की सुबह दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चौथी बड़ी सफलता हासिल करते हुए अवैध रूप से पीजी चलाने वाले मुख्य ऑपरेटर सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी इस मामले में चल रही गहन जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उस लापरवाही की परतों को खोल रही है जिसके कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे

सुधांशु की गिरफ्तारी का रास्ता तब साफ हुआ जब पुलिस रिमांड के दौरान पहले से गिरफ्तार आरोपी महेश ने पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए। महेश ने पुलिस को बताया कि उसने अगस्त 2025 में इस पूरी पांच मंजिला इमारत को दो बिजनेस पार्टनर्स, शुभम त्यागी और सुधांशु को लीज पर दिया था। ये दोनों साझेदार इस इमारत में हॉस्टल डेज के नाम से लड़कों का पीजी संचालित कर रहे थे। इस व्यावसायिक समझौते के तहत वे महेश को हर महीने 105000 रुपये का भारी-भरकम किराया देते थे।

महेश द्वारा दिए गए इस बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और सुधांशु को दबोच लिया। हालांकि, उसका दूसरा पार्टनर शुभम त्यागी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पुलिस की कई टीमें शुभम त्यागी की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। जांच का मुख्य केंद्र अब इस बात पर है कि क्या पीजी संचालन के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था और क्या इस आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि के लिए उचित अनुमति ली गई थी।

हादसे का विवरण और अब तक की गिरफ्तारियां

सत्य निकेतन में यह दर्दनाक हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ था। उस समय पांच मंजिला इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भीषण दुर्घटना में 7 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में अब तक कुल 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों में मकान मालिक हरिराम गुप्ता शामिल हैं, जिन्हें राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया था। इसके अलावा महेश और अब पीजी ऑपरेटर सुधांशु भी पुलिस की हिरासत में हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर का एक्शन

इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है और मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त निर्देशों के बाद, दुर्घटनास्थल के ठीक बगल में स्थित एक और खतरनाक और जर्जर इमारत को गिराने का फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेश पर दिल्ली नगर निगम ने बुधवार सुबह भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच बुलडोजर कार्रवाई शुरू की और इस असुरक्षित ढांचे को पूरी तरह से ध्वस्त किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के किसी अन्य हादसे की संभावना को खत्म किया जा सके। प्रशासन का उद्देश्य इलाके के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अवैध व जर्जर निर्माणों के खिलाफ कड़ा संदेश देना है।