कर्ज लिया 6 हजार करोड़, वसूले गए 14 हजार करोड़… विजय माल्या ने पूछा- मुझे रिफंड कब मिलेगा?

शराब कारोबारी विजय माल्या ने दावा किया है कि जांच एजेंसियों ने उनके 6203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले 14131 करोड़ 60 पैसे से अधिक की वसूली की है। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए रिफंड की मांग की है और भगोड़ा कहे जाने पर आपत्ति जताई है।

शराब कारोबारी विजय माल्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं और इस बार उन्होंने अपने ऊपर लगे भगोड़े के ठप्पे को लेकर तीखा पलटवार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए कई पोस्ट के माध्यम से माल्या ने न केवल खुद को बेगुनाह बताया है बल्कि भारत सरकार की जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। माल्या का मुख्य तर्क उनके कर्ज की राशि और अब तक की गई वसूली के बीच के बड़े अंतर को लेकर है। उन्होंने दावा किया है कि बैंकों का जितना बकाया उनके ऊपर था जांच एजेंसियां उससे कहीं अधिक राशि पहले ही वसूल कर चुकी हैं। उन्होंने पूछा है कि जब वसूली कर्ज से ज्यादा हो चुकी है तो उन्हें अब भी भगोड़ा क्यों कहा जा रहा है।

कर्ज और वसूली के आंकड़ों का गणित

विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा पेश किए गए एक हलफनामे का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी है और उन्होंने जानकारी दी कि अदालत ने उनके ऊपर कुल 6203 करोड़ रुपये का कर्ज निर्धारित किया था। माल्या के अनुसार ईडी ने खुद अदालत में यह स्वीकार किया है कि साल 2021 तक उनसे कुल 14131 करोड़ 60 पैसे की वसूली की जा चुकी है। माल्या ने सवाल किया है कि जब कर्ज की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा रकम वसूली जा चुकी है तो पिछले पांच वर्षों से उन्हें मीडिया में धोखेबाज क्यों कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी जब्त संपत्तियों में से ही 350 करोड़ रुपये किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों के वेतन के रूप में बांटे गए थे। माल्या का तर्क है कि अब जबकि बैंकों का पूरा पैसा और उससे अधिक वसूल लिया गया है तो उनका बचा हुआ रिफंड उन्हें वापस मिलना चाहिए।

लंदन में रहने की मजबूरी और कानूनी अड़चनें

पैसों की वसूली के दावों के अलावा माल्या ने विदेश में रहने की अपनी वजह भी स्पष्ट की है। जो लोग उन्हें भारत लौटने से बचने वाला भगोड़ा कहते हैं उन्हें जवाब देते हुए माल्या ने कहा कि वह अपनी मर्जी से वहां नहीं रुके हैं। उन्होंने बताया कि वह 1992 से ही यूनाइटेड किंगडम के स्थायी निवासी हैं। फिलहाल कानूनी अड़चनों और तकनीकी कारणों की वजह से उन पर यूके छोड़ने की रोक लगी हुई है। माल्या का आरोप है कि यह सब भारत सरकार की दिखावटी कार्रवाई का नतीजा है और उनके मामले में घोर नाइंसाफी की गई है। उनका साफ कहना है कि वह भारत आने से जानबूझकर नहीं बच रहे हैं बल्कि वहां की कानूनी बंदिशों में बंधे हुए हैं जिसके कारण वह देश नहीं छोड़ सकते।

सरकार का रुख और प्रत्यर्पण की कोशिशें

माल्या भले ही खुद को पीड़ित बता रहे हों लेकिन भारत सरकार उन्हें वापस लाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। अक्टूबर 2025 में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया था कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 के तहत विजय माल्या समेत 15 लोगों को भगोड़ा घोषित किया गया है। इस सूची में नीरव मोदी का नाम भी शामिल है। विदेश मंत्रालय ने भी साफ कर दिया है कि ऐसे अपराधियों को भारत की अदालतों के सामने पेश होना ही पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि सरकार भगोड़ों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने माना कि इसमें कई जटिल कानूनी प्रक्रियाएं शामिल हैं लेकिन विदेशी सरकारों से इस संबंध में लगातार बातचीत जारी है ताकि उन्हें कानून के दायरे में लाया जा सके।

अदालत की सख्ती और याचिका पर सुनवाई

सरकार के साथ-साथ अदालतों का रुख भी माल्या को लेकर बेहद सख्त बना हुआ है और इसी साल फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया था कि कोई भी व्यक्ति जो जानबूझकर कानूनी कार्यवाही से बच रहा है वह कोर्ट से किसी भी प्रकार की राहत की उम्मीद नहीं कर सकता और मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें माल्या ने खुद को भगोड़ा घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने माल्या को अपना रुख साफ करने का आखिरी मौका देते हुए पूछा था कि क्या वे वास्तव में भारत लौटने का इरादा रखते हैं। कोर्ट का मानना था कि माल्या जानबूझकर अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रह रहे हैं इसलिए उन्हें उनकी याचिका में कोई राहत नहीं दी जा सकती।