कच्चा तेल 100 डॉलर के पार: अमेरिका और ईरान में तनाव से बाजार में खलबली

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति बाधित रही तो कीमतें 120 डॉलर तक जा सकती हैं, जिससे भारत जैसे आयातकों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 9 सितंबर 2026 को एक बड़ा आर्थिक भूचाल देखने को मिला जब मध्य पूर्व में सैन्य संघर्ष के अचानक तेज होने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई। 24 जुलाई के बाद यह पहला मौका है जब कच्चे तेल के दाम इस ऊंचाई पर पहुंचे हैं। इस उछाल के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने इस महत्वपूर्ण क्षेत्र से तेल की आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंताओं को जन्म दिया है और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों और होर्मुज स्ट्रेट जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग से आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंजों में भारी जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम जोड़ दिया है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत पेट्रोलियम परिवहन इसी स्ट्रेट से होता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार की रुकावट की खबर वैश्विक इक्विटी बाजारों, सरकारी बॉन्ड यील्ड और करेंसी मार्केट्स में खलबली मचाने के लिए पर्याप्त है।

कीमतों में उछाल का विस्तृत विवरण

बुधवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स की कीमत 100 डॉलर के स्तर को पार कर गई। 2 प्रतिशत) बढ़कर 100 डॉलर 7 सेंट प्रति बैरल पर पहुंच गया। 83 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 94 डॉलर 73 सेंट प्रति बैरल पर बंद हुआ। पिछले महीने की शुरुआत से अब तक ब्रेंट की कीमतों में लगभग एक-चौथाई की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीनों से चल रहे तनाव का कोई स्थायी समाधान न निकलना निवेशकों को डरा रहा है, जिससे कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है।

सैन्य कार्रवाई और अमेरिकी रुख

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाना जारी रखेगा। कोलंबिया यात्रा के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान लगातार अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर हमला करने की कोशिश कर रहा है और हर ऐसी कोशिश के जवाब में उन्हें अपने टैंकर गंवाने पड़ेंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि 8 सितंबर को उनकी सेना ने ईरान के 5 क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर पिछले दो दिनों में हुए मिसाइल हमलों के जवाब में की गई। इसके अलावा, जॉर्डन के एयर-डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई 20 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 18 को सफलतापूर्वक हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि बाकी 2 मिसाइलें निर्जन इलाकों में गिरीं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयातक देश के लिए, जो अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की कीमत एक बड़ा आर्थिक झटका है। आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल लगभग 13 से 15 बिलियन डॉलर बढ़ जाता है। इससे देश का चालू खाता घाटा (CAD) चौड़ा होता है और भारतीय रुपये पर डॉलर के मुकाबले भारी दबाव बनता है और इसके अतिरिक्त, महंगे ईंधन के कारण खुदरा महंगाई (CPI) के दोबारा बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यदि महंगाई बढ़ती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए आगामी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे आर्थिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है।

भविष्य के अनुमान और विशेषज्ञों की राय

गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि अगर मिडिल ईस्ट में शिपिंग पर हमले और तेज होते हैं, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। गोल्डमैन सैक्स में ग्लोबल कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड डान स्ट्रुवेन ने कहा कि शिपिंग में बड़ी रुकावट का जोखिम अब एक गंभीर चिंता बन गया है और उन्होंने निवेशकों को सलाह दी है कि वे न केवल कच्चे तेल, बल्कि नैचुरल गैस और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की ऊंची कीमतों के लिए भी तैयार रहें। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि आपूर्ति में रुकावट का हर अतिरिक्त महीना ब्रेंट की कीमतों में 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी कर सकता है। यदि यह रुकावट तीन महीने तक चलती है, तो औसत मासिक ब्रेंट कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। सिटी ने भी तीसरी तिमाही के लिए अपने औसत ब्रेंट क्रूड कीमत के अनुमान को 80 से बढ़ाकर 86 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जबकि ANZ के विश्लेषकों ने शॉर्ट-टर्म अनुमान को 95 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ा दिया है।